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कुरान तर्जुमा और तफसीर -सूरए बक़रह 2:89-107, जादू टोना और यहूदी

सूरए बक़रह की ८९ नवासीवीं आयत इस प्रकार है। और जब ईश्वर की ओर से उनके लिए क़ुरआन नामक किताब आई (जो उन निशानियों के अनुकूल थी जो उनके पा...

ज़बान से ही जन्नत और जहन्नम है

1. इमाम अली (अ.स.) जो शख्स भी कोई चीज़ अपने दिल मे छुपाने की कोशिश करता है तो उसके दिल की बात उसकी जबानी ग़लतीयो और चेहरे से मालूम ...

नमाज़ क़ौल ऐ मासूमीन (अ.स) के आईने में |

رسول اكرم صلى الله عليه و آله  لا تَزالُ اُمَّتى بِخَيرٍ ما تَحابّوا وَ اَقامُوا الصَّلاةَ و َآتَوُا الزَكاةَ و َقَروا الضَّيفَ... ...

लुक़मा ऐ हराम मोमिन को मुनाफ़िक़ और इमामत का क़ातिल तक बना सकता है |

इमाम हुसैन ने आशूर के दिन शहादत के कुछ पहले खुत्बा दिया जिसमे उन्होंने कोशिश की कि यह लश्कर ऐ यज़ीद राह ऐ हक़ पे आ जाय लेकिन जब इमाम ख...

ईद में मुस्लमान आपस में गले क्यों मिलते हैं खुश क्यों होते हैं | : हज़रत अली की ज़बानी

सभी लोगों को ईद की मुबारकबाद  मैखान-ए-इंसानियत की सरखुशी, ईद इंसानी मोहब्बत का छलकता जाम है। आदमी को आदमी से प्यार करना चाहिए, ईद क...

क्या आपका परिवार या क़ौम टूट के बिखर रही है ?

वो खुशनसीब होता है जिसके घर वाले पति पत्नी भाई बहन उसके सुख दुःख के साथी होते हैं लेकिन कुछ बदनसीब होते हैं जिन्हे अपने ही घर में ...

कभी नहीं भूलियेगा की तारीफ मौला अली की और पैरवी इब्लीस की जहन्नम का सीधा रास्ता है |

क्या अली (अ ) के विचारों, अक़वाल और वसीयतों को सिर्फ इमामबाड़ों और मिम्बरों तक महदूद करके हम अली वाले और मोमिन कहलायेंगे ?एस एम् मासूम...

क़दम ऐ रसूल (स) के निशानात की हकीकत |

मान्यता है कि कि पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब जब पहाड़ों पर चलते थे तो उनके पैरों के निशान शिला पर अंकित हो जाते थे। आज भारत में ऐसे अनगि...

दूसरों से मश्विरा लेना ईमान की पहचान |

क़ुरान मजीद सुरए शूरा में अल्लाह फरमाता है इमान वाले वो हैं जो नमाज़ क़ायम करते हैं अपने रब की पुकार का जवाब देते हैं ,नमाज़ क़ाएम कर...

और अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली की शहादत के 1400 साल पूरे हो गए |

मुसलमानो के खलीफा हज़रत अली इब्ने अभी तालिब को मस्जिद ऐ कूफ़ा में सुबह की नमाज़ में एक ज़ालिम इब्ने मुल्जिम से उस वक़्त शहीद  किया जब हज़रत...

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नजफ़ ऐ हिन्द जोगीपुरा का मुआज्ज़ा , जियारत और क्या मिलता है वहाँ जानिए |

हर सच्चे मुसलमान की ख्वाहिश हुआ करती है की उसे अल्लाह के नेक बन्दों की जियारत करने का मौक़ा  मिले और इसी को अल्लाह से  मुहब्बत कहा जाता है ...

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A small step to promote Jaunpur Azadari e Hussain (as) Worldwide.

भारत में शिया मुस्लिम का इतिहास -एस एम्.मासूम |

हजरत मुहम्मद (स.अ.व) की वफात (६३२ ) के बाद मुसलमानों में खिलाफत या इमामत या लीडर कौन इस बात पे मतभेद हुआ और कुछ मुसलमानों ने तुरंत हजरत अबुबक्र (632-634 AD) को खलीफा बना के एलान कर दिया | इधर हजरत अली (अ.स०) जो हजरत मुहम्मद (स.व) को दफन करने

जौनपुर का इतिहास जानना ही तो हमारा जौनपुर डॉट कॉम पे अवश्य जाएँ | भानुचन्द्र गोस्वामी डी एम् जौनपुर

आज 23 अक्टुबर दिन रविवार को दिन में 11 बजे शिराज ए हिन्द डॉट कॉम द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पत्रकार भवन में "आज के परिवेश में सोशल मीडिया" विषय पर एक गोष्ठी आयोजित किया गया जिसका मुख्या वक्ता मुझे बनाया गया । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी

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