नमाज़ ए जनाज़ा तकबीर के साथ हिंदी में

Namaz e Mayyat 

इस नमाज़ में वज़ू या ग़ुस्ल की ज़रूरत नही लेकिन किबला रुख होना ज़रूरी।

नीयत : नमाज़ ए जनाज़ा पढ़ता हूँ मैं फुलां इब्ने फुलां वाजिब क़ुरबत इल्लल्लाह।

नमाजे मय्यत मय्यत को गुस्ल व कफन देने के बाद नमाज़ पढे। जिसकी चार तकबीरे हैं।

पहली तकबीर:

अल्लाहु अकबरः बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम अश्हदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, व अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह, अरसलहू बिल हक्कि बशीरंव वनजीरम बैना यदैहिस्साआ।

दूसरी तकबीर:

अल्लाहु अकबर: बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम अल्लाहुम्मा सललि अला मुहम्मदिव व आलि मुहम्मदिव व बारिक अला मुहम्मदिव व आलि मुहम्मदिव वरहम मुहम्मदन व आलि मुहम्मदिन कअफ्जलि मा सल्लयता व बारक्त व तरहहमता अला इब्राहीमा व आलि इब्राहीमा इन्नका हमीदुम्मजीद व स्वल्लि अला जमीइल अंबियाइ वल मुर्सलीन।

तीसरी तकबीरः

अल्लाहु अकबरः बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम अल्लाहुम्मर फ्रि लिल मुमिनीना वल मुमिनाति वल मुस्लिमीना वल मुस्लिमातिल अहयाइ मिन्हुम वल अम्बाति ताबि बैनना व बैनहुम बिलखैराति इन्नका मुजीबुद्वावाति इन्नका अला कुललि शैइन कदीर।

चौथी तकबीरः

अल्लाहु अकबरः बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम अल्लाहुम्मा इन्ना हाज़ा अब्दुका व्ब्नु अबदका व्ब्नु अबदका वनु उम्मतिका नज़ला बिका वअन्ता खैरू मन्जूलु बिही, अल्लाहुम्मा इन्ना ला नालमु मिन्हु इल्ला खैरंव वअन्ता आलमु बिहि मिन्ना अल्लाहम्मा इन काना महसिनन फज़िदनी इहसानिडी व इन काना मुसीअन फतजावज़ अन्ह वरफिर लहु अल्लाहुम्मज अल्हु इन्दका फी आला इल्लिय्यीना वख्लुफ अला अहलिही फ़िलगाबिरीना वर हम्हु बिरहमतिका या अर-हमर-राहिमीन।

अल्लाहु अकबर कहे और कुनूत पढकर नमाज़ तमाम करे। अगर मय्यत औरत की हो तो चौथी तकबीर इस तरह पढे।

अल्लाहु अकबरः बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम अल्लाहुम्मा इन्ना हाज़िहि अमतुका वनतु अब्दिका वनतु अ-म-ति-क नज़लत बिका वअन्त खैरू मन्जूलिन बिही, अल्लाहुम्मा इन्ना ला नालमु मिन्हु इल्ला खैरंव वअन्ता आलमु बिहि मिन्ना अल्लाहुम्मा इन कानत महसिनतन फ़ज़िदनी इहसानिहा व इन काना मुसीअतन फ़तजावज़ अन्हा वग्फिर लहा अल्लाहुम्मज अल्हा इन्दका फी आला इल्लिय्यीना वख्लुफ़ अला अहलिहा फिलगाबिरीना वर हम्हा बिरहमतिका या अरहम हिमीन।

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