और अमीरुल मोमिनीन हज़रत अली की शहादत के 1400 साल पूरे हो गए |

मुसलमानो के खलीफा हज़रत अली इब्ने अभी तालिब को मस्जिद ऐ कूफ़ा में सुबह की नमाज़ में एक ज़ालिम इब्ने मुल्जिम से उस वक़्त शहीद  किया जब हज़रत...



मुसलमानो के खलीफा हज़रत अली इब्ने अभी तालिब को मस्जिद ऐ कूफ़ा में सुबह की नमाज़ में एक ज़ालिम इब्ने मुल्जिम से उस वक़्त शहीद  किया जब हज़रत अली सजदे में थे | यह १९ रमज़ान १४४० AH (26 jan 661 CE ) की सुबह थी  जब रसूल ऐ खुदा हज़रत मुहम्मद के दामाद हज़रत अली को ज़रबत लगी और उसी ज़ख्म से दो दिन बाद २१ रमजान को मौला दुनिया से रुखसत हुए | 

यह अली  अबितलिब ही थे की जब लोगों ने इब्ने मुल्जिम को पकड़ लिया और रस्सियों से बाँधा तो इब्ने मुल्जिम की कराह सुन के मौला ने कहा इसकी रस्सियां ढीली कर दो इसे तकलीफ हो रही है | हज़रत अली इब्ने अबितलिब के इल्म का कोई मुक़ाबला नहीं था | अदालत ,सदाक़त ,सब्र के साथ साथ उनकी दी हुयी हिदायतें आज तक मुसलमानो के लिए मिसाल बनी हुयी है | 

हर मुसलमान पे अली की विलायत का इक़रार फ़र्ज़ है जिसका मतलब होता है उनकी पैरवी करो उन्ही हिदायतों नसीहतों और हुक्म को मानो | यह अली ने ही तो बताया है ना की दनिया का हर इंसान तुम्हारा किसी न किसी रिश्ते से भाई है चाहे वो धर्म भाई हो या इंसानियत के रिश्ते से भाई हो | यह अली ने ही तो सिखाया है की भूखे प्यासे से उसका धर्म नहीं पूछा जाता पहले उसकी भूख मिटाओ | 

ऐसी ना जाने कितनी मिसालें उनके जीवन से दी जा सकती है जो मेरा इस वक़्त विषय नहीं है | यह अली की ही ज़ात है की दुनिया का कर मुसलमान उनकी इज़्ज़त करता है और उनकी याद दिलों में बसाय रहता है | आज १४०० सालो से १९ से २१ रमज़ान उनको चाहने वाले उनकी शहादत को लोगों को बता के आंसू बहाते हैं और केवल इतना ही नहीं अली के दर से मुरादें पूरी होती है मुश्किलें दूर होती है | 

अहम् सवाल यह है की हमारे दिलों में अली की याद हरदम रहती है उनके दर से मुरादें पूरी होंगी यह यक़ीन हर चाहने वाले को है लेकिन क्या अली का पैगाम फ़क़त इतना था की उनकी याद में आंसू कहा लो और मुरादें पूरी करवा लो ?

क्या उनकी पैरवी करना उनकी हिदायतों पे चलना हमारे लिए ज़रूरी नहीं ? यक़ीनन  अली की सारी  क़ुर्बानियां इसी लिए थी की हम सब को एक ऐसा  ज़िन्दगी जीने का सलीक़ा सीखा जाएं जिसमे दनिया में भी कामयाबी हासिल होती हो और आख़िरत में भी लेकिन हमने अली की याद को चद आंसुओं और मुरादें मांगने में ही महदूद कर दिया और असल मक़सद भूल गए | 

आज १४०० साल शहादत के पूरा होने पे हमें इस बात पे गौर औ फ़िक्र करने की ज़रुरत है की हम कहाँ तक अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभा सके हैं और अली (अ .स) के मक़सद को पूरा कर सके हैं | 




प्रतिक्रियाएँ: 

Related

Majalis 3622457628367582945

Post a Comment

emo-but-icon

Follow Us

Hot in week

Recent

Comments

Admin

Featured Post

नजफ़ ऐ हिन्द जोगीपुरा का मुआज्ज़ा , जियारत और क्या मिलता है वहाँ जानिए |

हर सच्चे मुसलमान की ख्वाहिश हुआ करती है की उसे अल्लाह के नेक बन्दों की जियारत करने का मौक़ा  मिले और इसी को अल्लाह से  मुहब्बत कहा जाता है ...

Discover Jaunpur , Jaunpur Photo Album

Jaunpur Hindi Web , Jaunpur Azadari

 

Majalis Collection of Zakir e Ahlebayt Syed Mohammad Masoom

A small step to promote Jaunpur Azadari e Hussain (as) Worldwide.

भारत में शिया मुस्लिम का इतिहास -एस एम्.मासूम |

हजरत मुहम्मद (स.अ.व) की वफात (६३२ ) के बाद मुसलमानों में खिलाफत या इमामत या लीडर कौन इस बात पे मतभेद हुआ और कुछ मुसलमानों ने तुरंत हजरत अबुबक्र (632-634 AD) को खलीफा बना के एलान कर दिया | इधर हजरत अली (अ.स०) जो हजरत मुहम्मद (स.व) को दफन करने

जौनपुर का इतिहास जानना ही तो हमारा जौनपुर डॉट कॉम पे अवश्य जाएँ | भानुचन्द्र गोस्वामी डी एम् जौनपुर

आज 23 अक्टुबर दिन रविवार को दिन में 11 बजे शिराज ए हिन्द डॉट कॉम द्वारा कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पत्रकार भवन में "आज के परिवेश में सोशल मीडिया" विषय पर एक गोष्ठी आयोजित किया गया जिसका मुख्या वक्ता मुझे बनाया गया । इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिलाधिकारी भानुचंद्र गोस्वामी

item