अमन का पैगाम देते यह लेखक,पत्रकार और ब्लॉगर |

हिन्दुस्तान साप्रदायिक सौहाद्र और भाईचारे की हमेशा से एक मिसाल रहा है जिसे सत्ता की लालच में बिगाड़ने की कोशिशें भी होती रही हैं |कभी पकिस...

हिन्दुस्तान साप्रदायिक सौहाद्र और भाईचारे की हमेशा से एक मिसाल रहा है जिसे सत्ता की लालच में बिगाड़ने की कोशिशें भी होती रही हैं |कभी पकिस्तान बंटा तो एक बड़ा नरसंहार हुआ |सारा खेल था राजनीती का मारे गए ,बेघर हुए आम हिन्दुस्तानी जिसे वो लोग आज भी याद करके रोते हैं जिन्होंने अपनों को खोया और बेघर हुए या जिनको अपना वतन छोड़ना पड़ा |उनकी आँखों के आंसू न तो किसी राजनीति से प्ररित हुआ करते हैं न किसी धर्म विशेष से जुड़े होने के कारण आते हैं बल्कि अपनों से बिछड़ने का ग़म ,वतन छुटने का ग़म आज भी कहीं दिल में दर्द बन के उभरता है | हिन्दुस्तान में तो हिन्दू-मुस्लमान आपस में एक साथ रहने के आदि थे उनको कहाँ यह पाकिस्तान और हिन्दुस्तान का बंटवारा समझ में आने वाला था लेकिन राजनितिक ताक़त रखने वालों के हाथ मजबूर इसे अपनी नियति जान के जहां पहुँच गए वहीँ घर बना लिया |


वरिष्ट ब्लॉगर और शायर इस्मत जैदी ने क्या खूब कहा है कि -
जब बात आश्ती की, अम्नो अमां की आये ,
बस मुस्कुराहटें ही इक दूसरे को दे दो .
अब बुग्ज़ और कीना, दिल से निकाल फेंको,
ये चाल है सियासी, तुम इनको मात दे दो

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कुछ ऐसे लोग भी इस समाज में होते हैं जो कभे उनका मज़ाक नहीं उड़ाते जो समाज में भड़काऊ भाषण देते हैं या समाज में नफरत अपने लेखों  आज भी इस हिन्दुस्तान में वैसे ही लोग रहा करते हैं और अमन शांति से साथ साथ रहना भी चाहते हैं वर फैलाते हैं लेकिन अमन और शांति का पैगाम इन्हें रास नहीं आता |सामने से तो यह कुछ कह नहीं पाते लेकिन पीछे मजाक अवश्य उड़ाते हैं की फलां साहब हैं जो अमन और शांति का पैगाम देते हैं शायद इन्होने अपने बच्चों का नाम अमन और शांति रख दिया है और खुश हैं की समाज में अमन और शांति बनी हुयी है | यह सत्य है की बच्चों का नाम रखने का नाम अमन और शांति के लिए काम करना नहीं हुआ करता और इसी लिए  मैंने सन २०१० में हिंदी ब्लॉगजगत से अपने अमन के पैगाम की शुरुआत की और यह अधिकतर हिन्दू-मुस्लिम ब्लॉगर भाई बहनों के सहयोग से कामयाब रहा | लोगों ने आगे बढ़ बढ़ के मुझे अपने पैगाम भेजे और उन्हें सराहा | सभी ब्लॉगर ने  मिल के अमन का पैगाम पहुंचाया आज उसे को मैं आप सभी तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा हूँ |बहुत जल्द इस अमन के पैगाम को किताबी शक्ल दे के लोगों तक पहुँचाया जायेगा |

 हमारे ब्लॉगर भाई गिरिजेश जी कहते हैं खुदा ने हमें एक धरती बक्शी थी हमने हिन्दुस्तान और पकिस्तान बना लिया |

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३) ब्लॉगर रज़िया राज एक हिन्दुस्तानी ब्लॉगर हैं जिन्होंने अपना यह पैग़ाम अपनी हज यात्रा के दौरान दिया था जिस आज भी सब याद करते हैं |
उडते पँछी से जो मैने पूछ लिया जो एक सवाल।
कौन देश क्या धर्म तुम्हारा, हँस के वो ऐसे गया टाल!
पँछी बोला सारी धरती, हमको तो लगती है अच्छी।
ना कोइ मज़हब टोके मुज़को, ना कोइ सीमा रोके मुज़को।
आसमाँन को बाँट के देख़ो, उँचनीच को बाँटनेवालो। ओ इन्सान को....
……………….रज़िया मिर्ज़ा का आदाब    ......आगे पढ़ें


वरिष्ट ब्लॉगर समीर लाल जी अपने पैगाम में कहते हैं कि :
समीर जी अपने शांति सन्देश मैं कहते हैं :
हर दिल की यह चाहत है कि चहु ओर अमन कायम हो-फिर आखिर वो कौन हैं जो अमन कायम नहीं होने देते, चैन से रहने नहीं देते. चंद सिरफिरे सियासी लोगों के स्वार्थ भरे मंसूबे ठीक वैसे ही कामयाब हो जाते हैं जैसे एक मछली सारे तालाब को गंदा करती है या खराब मुद्रा अच्छी मुद्रा को चलन के बाहर कर देती है. …समीर लाल
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श्री राजेन्द्र स्वर्णकार भी एक वरिष्ट ब्लॉगर हैं उनका यह अमन का अंदाज़ देखिये
सच में आज इंसान इंसानियत खो'कर कुछ और ही बनता जा रहा है ।
मेरे एक गीत की कुछ पंक्तियां आपको सादर समर्पित हैं
ये हिंदू है ! ये है मुस्लिम !
हिंदू कहां जाएगा प्यारे ! कहां मुसलमां जाएगा ?
इस मिट्टी में जनमा जो , आख़िर वो यहीं समाएगा !
ये हिंदू है ! ये है मुस्लिम ! आगे पढ़ें

internet revolution
डॉ अनवर जमाल साहब ने भी एक सन्देश दे डाला की " भारतीय समाज अपने स्वभाव से ही सहनशील है। यही वजह है कि अमन के दुश्मनों की लाख कोशिशों के बावजूद भी भारतीय समाज से शांति का लोप नहीं हो सका है।आग नफ़रत की दिलों से तुम बुझा दो लोगोप्यार के फूल गुलशन में फिर खिला दो लोगोएक थे एक हैं और एक रहेंगे हम सदायह अमल करके दुश्मन को दिखा दो लोगो …………डॉ  अनवर जमाल





ब्लॉगर देवेन्द्र पाण्डेय अपने मन को यह समझाते हुए की दुष्म कौन है देखिये क्या कहते हैं ?
तड़पता है मेरे भीतर
कोई
मुझसा
मचलता है बार-बार
बच्चों की तरह
जिद करता है
हर उस बात के लिए
जो मुझे अच्छी नहीं लगती।
यह करांची में
आतंकवादियों के धमाके से मारे गए निर्दोष लोगों के लिए भी
उतना ही रोता है
जितना
कश्मीर के अपने लोगों के लिए !
मैं उसे समझाता हूँ
वह शत्रु देश है
वहाँ के लोगों को तो मरना ही चाहिए।
मेरा समझाना बेकार
मेरा डांटना बेअसर

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ऐसा नहीं की मेरा अमन का पैगाम देने पे किसी ने उसका मज़ाक नहीं उड़ाया लेकिन उन मज़ाक उड़ाने वालों का मज़ाक देखे एक बच्ची पूजा शर्म से नहीं रहा गया और उसने कह ही डाला   की -

इन्हें समझाना थोड़ी-सी टेड़ी खीर है
शायद उसकी वजह, इनका सोया हुआ ज़मीर है.
पर ये तो अमन, चैन, मोहब्बत, शांति, भाईचारा...
सबकुछ जानतें हैं...
ज़रा कभी पूछना इनसे... बतायेंगें...
अमन... किसी लड़के का नाम है
शायद इसी शहर के दूसरे मोहल्ले में रहता है
और 12th कक्षा पढता है...
चैन... चांदी या सोने की होती है
पर आज-कल लोग कम ही पहनते
पूजा शर्मा...................आगे पढ़ें



ब्लॉगर तारकेश्वर गिरी साहब की शक्सियत ब्लॉगजगत में के खरा लिखने वाले के सी रही है उनका कहना था मेरा अनुरोध है सभी भाई बहनों से ,मासूम साहब के चलाए इस इस अमन के पैग़ाम को मिल के आगे बढाएं. क्योंकि इसका असर अभी से ब्लॉगजगत मैं दिखने लगा है | तारकेश्वर गिरी.....आगे पढ़ें


ब्लॉगजगत के जीते जागते संकलक और महान ब्लॉगर का कहना है कि “ मेरी नज़र में बुराई इन लोगो में नहीं बल्कि कहीं न कहीं हमारे अन्दर है, हम ऐसे लेखों को जहाँ दूसरों को गालियाँ दी जा रही हो, मज़े ले-लेकर पढ़ते हैं. क्या कभी हमने विरोध की कोशिश की? आज समय दूसरों को बुरा कहने की जगह अपने अन्दर झाँक कर देखने का है, मेरे विचार से शुरुआत मेरे अन्दर से होनी चाहिए.” शाहनवाज़ सिद्दीकी
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अंजना गुडिया जी का पैगाम कुछ इस तरह है
नाराज़ हो जाना, झगड़ लेना,
मेरी गलती पे चाहे जितना डांट देना,
पर अगली बार मिलो जो मुझसे,
बस एक बार दिल से मुस्कुरा देना
रंजिश ने हज़ारों दिलों में कब्रिस्तान बनाये हैं,
तुम अपने दिल में दोस्ती को धड़कने देना
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अमित शर्मा जी का मानना है कि ‘अमन वहीँ पनपता है जहाँ सभी सच्चे मन से सबके विचारों का आदर करते हुए जीवन जीए, ना की समाज में अपनी अपनी मान्यताओं को थोपने का दुराग्रह रखें...”

इसी सन्देश को  .......आगे पढ़ें



1369109559मैंने भी उसे सन्देश में अपना एक सन्देश दिया राजशाही और तानाशाही का नाम धर्म नहीं है. और आज जो चेहरा सभी धर्मो का दिखाई देता है, वो नकली मुल्लाओं,पंडितों और निरंकुश शासकों के बीच नापाक गठजोड़ का नतीजा है. ऐसा ही चेहरा इस्लाम का उस समय यजीद की बादशाहत मैं होने लगा था ,और उस से आज़ादी दिलवाई इमाम हुसैन (अलैहिस सलाम) ने अपनी क़ुरबानी कर्बला मैं दे के.
एस एम् मासूम ..आगे पढ़ें



अजय कुमार झा साहब का कहना है की .अमन तो अपने आप में खुद एक नियामत है ..खुद ही एक पैगाम है ...जिंदगी का , मोहब्बत का , इबादत का , कुदरत का ...अब क्या कहूं लीजीए दिल कहता गया ..मैं लिखता गया ..अब आपके हवाले ..आगे पढ़ें


इंसानियत का पैगाम कैसे दे रहे हैं जनाब संजय भास्कर साहब
ऐसी खुशी नहीं चाहता ,जो किसी का दिल दुखाने से मिले,
हंसी ऐसी नहीं चाहता ,जो किसी को रुलाने से मिले
……..संजय भास्कर.. आगे पढ़ें



महिला ब्लॉगर निर्मला कपिला जी का सन्देश अपने आप में एक यादगार सन्देश है
अहिंसा अमन सुख चैन की बातें कहाँ हैं अब
वो अवसर ढूँढते तलवार से अब वार करने का

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हिमांचल प्रदेश के केवल राम का कहना है
कुछ को दोस्त , कुछ को दुश्मन बनाना अच्छा लगता है ,
मुझे तो रिश्ता -ए-इंसानियत निभाना अच्छा लगता है.
हमने खुद को वादों में बाँट कर रखा और हम निरंतर बंटते जा रहे हैं , कभी भाषावाद , जातिवाद , क्षेत्रवाद , अस्तित्ववाद, आतंकवाद न जाने कितने वाद , परन्तु कहीं पर भी नाम नहीं आया , समतावाद का ,सर्वात्मवाद का ..वास्तविकता यह थी कि हम सब खुदा कि संतान है . सभी में खुदा का नूर है , सभी कि एक सी भाषा है , सभी का एक धर्म है...आगे पढ़ें


बहु चर्चित ब्लॉगर सतीश सक्सेना जी का पैगाम भी देखें आपको अवश्य पसंद आएगा
"मस्जिद की मीनारें बोलीं मंदिर के कंगूरों से,
संभव हो तो देश बचा लो मज़हब के लंगूरों से "
मुझे विश्वास है अगर हम एक जुट होकर एक साथ प्यार से, बिना एक दूसरे पर शक किये, रहना सीख जाएँ तो हम से अधिक खुशहाल और कौन होगा ? यह बात न केवल ब्लागर पर बल्कि परिवार और देश पर भी समान रूप से प्रभावी साबित होगी ! आगे पढ़ें







जौनपुर निवासी पवन मिश्र साहब की दुआ भी एक दिन अवश्य रंग लाएगी |
नए साल पर पूरी कर मेरे मन की मुराद मौला
मिरे वतन के सीने पर ना हो कोई फसाद मौला

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अनवर जमाल साहब का शांति सन्देश देने का अंदाज़ ही निराला है इस बेहतरीन अंदाज़ को भी देखें
भारतीय समाज अपने स्वभाव से ही सहनशील है। यही वजह है कि अमन के दुश्मनों की लाख कोशिशों के बावजूद भी भारतीय समाज से शांति का लोप नहीं हो सका है।
आग नफ़रत की दिलों से तुम बुझा दो लोगो
प्यार के फूल गुलशन में फिर खिला दो लोगो
एक थे एक हैं और एक रहेंगे हम सदा
यह अमल करके दुश्मन को दिखा दो लोगो
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लखनऊ के रहने वाली रांची से वीणा श्रीवास्तव जी |वीणा जी इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म मानती हैं. वीणा जी ने अपने जीवन के एक सच्चे वाकए से अमन का पैग़ाम दिया है. यह उनलोगों के लिए एक इबरत है जो धर्म के नाम पे अपने जैसे दूसरे इंसान को पसंद नहीं करते, दूरी बना के रखते हैं...

सबको नमस्कार, मैने सोचा जब इतना अच्छा काम किया जा रहा है, अमन का पैगाम दूर-दूर तक भेजा जा रहा है तो क्यों न मैं भी कोई पैगाम दूं क्योंकि आज हमारे मुल्क को अमन की बेहद जरूरत है। आज भाई-भाई आपस में लड़ रहे हैं, जाति-धर्म-मजहब की दीवारें हमने अपने आस-पास खींच ली हैं जिनसे हम बाहर निकलना ही नहीं चाहते। हम ये क्यों भूल जाते हैं कि हम पहले भाई हैं हमारा एक-दूसरे से इंसानियत का रिश्ता है और इस रिश्ते को किसी पहचान की जरूरत नहीं, हम इंसान हैं यही हमारे लिए महत्वपूर्ण है और होना भी चाहिए| आगे पढ़ें


रश्मि प्रभा... जी. अपना परिचय देते हुए रशिम जी कहती हैं "
”सौभाग्य मेरा की मैं कवि पन्त की मानस पुत्री श्रीमती सरस्वती प्रसाद की बेटी हूँ और मेरा नामकरण स्वर्गीय सुमित्रा नंदन पन्त ने किया और मेरे नाम के साथ अपनी स्व रचित पंक्तियाँ मेरे नाम की..."सुन्दर जीवन का क्रम रे, सुन्दर-सुन्दर जग-जीवन" , शब्दों की पांडुलिपि मुझे विरासत मे मिली है. अगर शब्दों की धनी मैं ना होती तो मेरा मन, मेरे विचार मेरे अन्दर दम तोड़ देते...मेरा मन जहाँ तक जाता है, मेरे शब्द उसके अभिव्यक्ति बन जाते हैं, यकीनन, ये शब्द ही मेरा सुकून हैं”……..रश्मि प्रभा
...
इनका दिया पैगाम आगे पढ़ें


अरुण चन्द्र राए पेशे से कॉपीरायटर तथा विज्ञापन व ब्रांड सलाहकार. दिल्ली और एन सी आर की कई विज्ञापन एजेंसियों के लिए और कई नामी गिरामी ब्रांडो के साथ काम करने के बाद स्वयं की विज्ञापन एजेंसी तथा डिजाईन स्टूडियो का सञ्चालन. अपने देश, समाज, अपने लोगों से सरोकार को बनाये रखने के लिए कविता को माध्यम बनाया है|अरुण जी अपने अमन के पैगाम में कहते हैं | आगे पढ़ें


वरिष्ट ब्लॉगर और हमारी बहन रेखा श्रीवास्तव जी का कहना है अमन की राह में रोड़े तो हैं लेकिन अगर हम मिलकर इन्हें धूल बनाना चाहे तो ये नामुमकिन नहीं है. ऐसा नहीं है कि हम अमन के दुश्मन से परिचित नहीं है फिर हम चुपचाप उनको सहते रहते हैं आखिर कब तक इनको सहा जायेगा. जन्म से मृत्यु तक कि प्रक्रिया हर इंसान में एक जैसी होती है - हाँ अगर कुछ अलग होता है तो वह उसकी सोच और यही सोच उसे इंसान , इंसानियत अमन और प्रेम का दुश्मन बना देती है| आगे पढ़ें



पेश के खिदमत है "अमन के पैग़ाम पे सितारों की तरह चमकें की छब्बीसवीं पेशकश हमारे मित्र जनाब खुशदीप सहगल साहब , जिनसे आप सभी वाकिफ हैं. खुशदीप भाई ने इसी साल ग्यारह अप्रैल को कौमी सौहार्द पर एक कहानी लिखी थी और यह उनका कहानी लिखने का पहला और बेहतरीन प्रयास था. आज उनके यह कहानी पेश कर रहा हूँ.. अतुलनीय प्रतिभा के धनी खुशदीप सहगल जी टीवी में वरिष्ठ प्रोडयूसर है.. आगे पढ़ें




संगीता पूरी जे का नाम कौन नहीं जानता | स्‍ट-ग्रेज्‍युएट डिग्री ली है अर्थशास्‍त्र में .. पर सारा जीवन समर्पित कर दिया ज्‍योतिष को .. अपने बारे में कुछ खास नहीं बताने को अभी तक .. ज्योतिष का गम्भीर अध्ययन-मनन करके उसमे से वैज्ञानिक तथ्यों को निकलने में सफ़लता पाते रहना .. बस सकारात्‍मक सोंच रखती हूं .. सकारात्‍मक काम करती हूं .. हर जगह सकारात्‍मक सोंच देखना चाहती हूं.
इनका सन्देश भी आगे पढ़ें



जनाब दानिश भारती साहब ने अपना सन्देश कुछ इस तरह दिया “
जनाब एस एम् मासूम साहब नमस्कार,अम्न का पैग़ाम मौज़ू पर ली गयी आपकी सभी रचनाएं कामयाब रहीं,इसी सिलसिले में अपनी एक ग़ज़ल इरसाल कर रहा हूँ,उम्मीद करता हूँ आप सब को पसंद आएगी और मकसद मैं कामयाब रहेगी. आजकल देहरादून से निकलने वाली साहित्यिक पत्रिका "सरस्वती-सुमन" के ग़ज़ल विशेषांक के अतिथि सम्पादन में व्यस्त हूँ आपकी साहित्य-साधना के लिये आपको साधुवाद कहता हूँ.

आगे पढ़ें दानिश साहब का सन्देश



क्रांति ही जीवन ..मीनाक्षी पन्त जी का कहना है |इतिहास गवाह है इन्सान ने जब भी किसी विपदा ( विपत्ति ) का सामना अगर किया है तो उसका जिम्मेदार वो खुद होता है ! उसी के द्वारा की हुई गलती का भुगतान वो बाद मै करता है ! क्युकी जब हम कोई भी फ़ेसला लेते हैं तो हमे सिर्फ वर्तमान का ही सुख दिखता है और उसी ख़ुशी का भुगतान हमे भविष्य मै दर्द सह कर देना होता है. .सन्देश आगे पढ़ें



शिखा वार्ष्णेय का नाम हिंदी चिट्ठाकारी में बहुत सम्मान के साथ लिया जाता है .दिल्ली की शिखा वार्ष्णेय की स्कूली शिक्षा वैसे तो रानीखेत में हुई है इन्होने मास्को स्टेट यूनिवर्सिटी से गोल्ड मैडल के साथ टी.वी. जर्नलिज्म में मास्टर्स करने के बाद कुछ समय एक टीवी चेनेंल में न्यूज़ प्रोड्यूसर के तौर पर काम किया ,इन्हें हिंदी भाषा के साथ ही अंग्रेजी ,और रुसी भाषा पर भी समान अधिकार है परन्तु खास लगाव अपनी मातृभाषा से ही है.वर्तमान में लन्दन में रहकर इनका स्वतंत्र लेखन जारी है. शिखा वार्ष्णेय जी के सुनहरे एवं यशस्वी भविष्य की कामना करते हुए आज यहाँ हम अमन के पैग़ाम के लिए उनकी भेजी एक रचना आपके लिए प्रस्तुत कर रहे हैं ..आगे पढ़ें



डॉ टी एस दाराल जी मेडिकल डॉक्टर, न्युक्लीअर मेडीसिन फिजिसियन हैं , ओ आर एस पर शोध में गोल्ड मैडल-- एपीडेमिक ड्रोप्सी पर डायग्नोस्टिक क्राइटेरिया ,सरकार से स्टेट अवार्ड प्राप्त, दिल्ली आज तक पर ,दिल्ली हंसोड़ दंगल चैम्पियन, नव कवियों की कुश्ती में प्रथम पुरूस्कार प्राप्त ब्लोगर हैं जो अब ब्लॉग के जरिये जन चेतना जाग्रत करने की चेष्टा, कर रहे हैं , इसका उसूल है हंसते रहो, हंसाते रहो, जो लोग हंसते हैं, वो अपना तनाव हटाते हैं.जो लोग हंसाते हैं, वो दूसरों के तनाव भगाते हैं. आगे पढ़ें



जनाब जीशान जैदी साहब ने आज के हालात को देखते हुए कह ही डाला फिर एक हुसैन चाहिए |आशा है आप सब भी इसको पढके तारीख इंसानियत के  उस बादशाह को याद करेंगे जिसने ज़ुल्म और आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुई अपनी शहादत दी.जिसने यह साफ़ साफ़ एलान कर दिया कि अगर कोई  इंसान जो खुद को मुसलमान कहता है और बेगुनाह पे ज़ुल्म भी करता है तो उसके साथ रहने और उसका साथ देने से बेहतर है कि किसी अमन पसंद ग़ैर मुसलमान इंसानों के साथ रहो.   आगे पढ़ें


टीवी सेरिअल्स की मशुर अदाकारा लता हया साहेबा का मेरे अमन के पैगाम के बारे में कहना है कि “आदाब मासूम साहेब आपका ब्लॉग अब सिर्फ़ आपका नहीं रह गया है बल्कि पूरे हिंद का हो गया है क्योंकि इसमें तमाम हिन्दुस्तानियों का अम्न के लिए धड़कता हुआ दिल है .शांति के लिए तरसती चाहत है . आपकी इस कोशिश को तो ख़ुद ये पैग़ाम सलाम करते हैं.” लता हया...आगे पढ़ें









यह पैगाम देने वाले विश्व के नामी गिरामी साहित्यकार , डॉक्टर , लेखक, ब्लॉगर महिलाएं पुरुष ,हिन्दू ,मुसलमान ,कलाकार और पत्रकार लोग हैं और यह लिस्ट अभी बहुत लम्बी है जिसे एक लेख में देना शायद संभव नहीं | रचना बजाज, अख्तर खान अकेला, दीप पाण्डेय ,कुंवर कुसुमेश, हरकीरत हीर  ,दीप पाण्डेय , लता हया ,नीरज गोस्वामी ,मुकेश कुमार, डॉ रूपचंद्र शास्त्री मयंक , इत्यादि और यह लिस्ट हर दिन बढती ही जा रहे है जिसे अब किताब की शक्ल में भी पेश किया जायेगा |


इन पैगामो को देखने से साफ़ दिखाई देता है ज्ञानी आज भी अमन और शांति की राह तलाश रहा है और मुझे यकीन है ऐसी ही कोशिशें लोग करते रहे तो एक दिन कामयाबी हमारे क़दम चूमेगी |अमन का पैगाम समाज में अपने बच्चों का नाम अमन और शांति रखके नहीं बल्कि ज़मीनी स्तर पे इसके लिए काम कर के दिया जाता है| आप सभी से अनुरोध है की आप भी अपना क़दम आगे बढायें लोगों को अमन और शांति का पैगाम दें और खुद भी इसके लिए कोशिशें करें | मैं इसी को अपनी कलम का इस्तेमाल जान हित में करना मानता हूँ |

इन्ही ब्लॉगर  द्वारा भजा गया लेख अब आप देख और सुन भी सकते हैं | कुछ आपके सभी के सामने पेश हैं |


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  1. मंदिर-मस्जिद
    हिन्दू कहता चाहे कुछ हो,
    मंदिर यहीं बनाएँगे|
    मुल्लाओं का कौल यही है,
    मस्जिद नहीं गिराएँगे|

    लालबुझक्कड बनते हैं,
    क्या इतना मुझे बताएँगे?
    पूंछा है क्या राम-रहीम से,
    वे रहने यहाँ पर आएंगे?

    क्या इतने पैसे वाले हो,
    कि उसको घर दिलवाएँगे?
    महंगाई के इस आलम में,
    फिर खुद कैसे खाएँगे?

    खून खराबे, राग, द्वेष से,
    रब्बा को भरमाएंगे?
    ढ़ोर गम्मर्रे जिद करते हैं,
    उस पर रौब जमाएंगे|

    मौला तो रहता उस दिल में,
    जिसमें प्रेम भरा होता|
    नफरत के कालीनों पर तो,
    उसका घाव हरा होता|

    क्या तुम ठेकेदार राम के,
    या अल्ला के पैरोकार?
    लड़ना होगा खुद लड़ लेंगे,
    तुमको है क्या सारोकार?

    मेरा मंदिर, उसकी मस्जिद,
    यह कैसी दाबेदारी?
    जीवन की सच्ची दौलत है,
    बस उसकी ताबेदारी|

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