13 सफ़र दमिश्क़ में बीबी सकीना (स:अ) की शहादत

इमाम हुसैन (अ.स) की बेटी सकीना को बाद इ शहादत इ इमाम हुसैन (अ.स) बहुत ज़ुल्म सहने पड़े, जिनका तसव्वुर भी आँखों मैं अश्क भर  देता है. सैयेद...

7788081_1 (1) इमाम हुसैन (अ.स) की बेटी सकीना को बाद इ शहादत इ इमाम हुसैन (अ.स) बहुत ज़ुल्म सहने पड़े, जिनका तसव्वुर भी आँखों मैं अश्क भर  देता है.
सैयेदाह सकीना (अ:स) फ़रमाती हैं, के एक जुमारत के दिन सीरिया में मैंने एक  ख़्वाब देखा, !
वो फ़रमाती हैं की मैंने देखा की एक मोमिना एक ऊँट पर सवार हैं और अपना हाथ अपने सर पर रखे हुए हैं. मेरे पूछने पर की वोह कौन हैं, मुझे जवाब मिला की वोह "जनाब फ़ातिमा ज़हर (स:अ), अल्लाह के पैगंबर हज़रत मुहम्मद (स:अ:व:व) की पुत्री और मेरी दादी है!" मैंने अपने आप से कहा मुझे इनसे अपने ऊपर हुए सारे ज़ुल्मो सितम ब्यान करने चाहिए, यह सोचते हुए मै उनकी तरफ दौड़ी! मै उनके सामने बैठ गयी और रोना शुरू किया और कहा, "ऐ अम्मा, अल्लाह की क़सम, ईन जालिमों ने हमारे हक़ छीने, ऐ अम्मा ईन लोगों ने हमारे सारे कुनबे को मार डाला, ऐ अम्मा ईन लोगों ने हमारी पवित्रता का उल्लंघन किया है, ऐ अम्मा, अल्लाह की क़सम है के इनलोगों ने मेरे बाबा की ह्त्या की है!" उनहोंने जवाब दिया, "ऐ मेरी प्यारी सकीना, अल्लाह के वास्ते चुप होजा क्योंकि तेरे ब्यान से मेरा दिल टुकड़े टुकड़े हुए जा रहा है, यह तेरे बाबा का कुर्ता है जो मैंने अपनेपास हिफाज़त से उस दिन के लिए रख़ा हुआ है, जिस दिन में अल्लाह से मिलूंगी!


शेख इब्ने नीमा फरमाते हैं की सैयेदाह सकीना (अ:स) ने दमिश्क़ में यह ख़्वाब देखा जिसमे पांच नूरानी घोड़े आये हैं, और सभी पर एक प्रतिष्ठित शख़्सियत सवार है, और उन सभी को फरिश्तों ने चारों तरफ से घेर रख़ा है, और जन्नत से एक दासी (ग़ुलाम) भी उनके साथ है! वोह सभी घुड़सवार आगे बढ़ गए, परन्तु दासी मेरे पास आयी और कहने लगी, "आपके दादा ने आप पर सलाम भेजा है!" मैंने कहा, "अल्लाह के रसूल(स:अ:व:व) पर सलाम हो, आप कौन हैं?" उन्होंने कहा, "मै जन्नत की एक दासी हूँ" मैंने पूछा,"यह कौन लोग हैं जो ईन आलिशान घोड़ों पर सवार होकर यहाँ आयें हैं?" उन्होंने जवाब दिया," यह हज़रत आदम (अ:स) हैं जो अल्लाह द्वारा चुने हुए है (सिफ्वतुल्लाह), दुसरे हज़रत इब्राहीम (अ:स) हैं जो अल्लाह के दोस्त है (खलिलुल्लाह), तीसरे हज़रत मूसा (अ:स) हैं जिनसे अल्लाह ने बात की थी (कलीमुल्लाह), चौथे हज़रत इसा (अ:स) हैं जो अल्लाह की आत्मा हैं (रूहिल्लाह)" मैंने पुछा, "वोह कौन हैं जिन्होंने अपनी दाढ़ी पकड़ रखी है और जो ऊपर और नीचे हो रहे हैं?" उसने कवाब दिया, "वो आपके दादा रसूले (स:अ:व:व) ख़ुदा हैं" मैंने पुछा, "यह कहाँ जा रहें हैं?" उसने जवाब दिया, "यह लोग आपके पिता इमाम हुसैन (अ:स) के पास जा रहें हैं" यह सुनकर मै उनकी तरफ दौड़ी के उनको बताऊँ के कैसे जालिमों ने शहादते हुसैन (अ:स) के बाद हम पर अत्याचार किये हैं,उसी समय पांच नूरानी ऊँट-सवार पहुँच गए जिसमे हर पर एक बा-विकार मोमिन बैठीं थीं! मैंने फिर पुछा, "यह औरतें कौन हैं जो अभी अभी आयें हैं?" जवाब मिला,"पहली जनाब हव्वा (स:अ) है जो मानवता की माँ हैं, दूसरी जनाब आसिया (स:अ) हैं जो मज़ाहीम की पुत्री (फ़िरओन की पत्नी) हैं, तीसरी जनाब मरयम (स:अ) हैं जो हज़रत इमरान (अ:स) की पुत्री और हज़रत इसा (अ:स) की माँ हैं, चौथी जनाब ख़दीजा हैं जो जनाब ख़ुवैलिद की पुत्री और हज़रत मुहम्मद (स:अ:व:व) की पत्नी हैं और पांचवीं जिनका हाथ उनके सर पर जो नीचे-ऊपर हो रहा है वोह कोई और नहीं बल्कि आपकी दादी जनाब फातिमा ज़हरा (स:अ) हैं जो हज़रत मुहम्मद (स:अ:व:व) की पुत्री हैं और आपके बाबा इमाम हुसैन (अ:स) की माँ हैं!" मैंने कहा, "अल्लाह की क़सम, मुझे इनसे यह ज़रूर बताना चाहिए की इनलोगों ने हमसे कैसा व्यावहार किया है!" यह कहते हुए मैं उनके सामने बैठगयी और कहा, "ऐ प्यारी अम्मा, अल्लाह की क़सम, ईन जालिमों ने हमारे हक़ छीने, ऐ अम्मा ईन लोगों ने हमारे सारे कुनबे को मार डाला, ऐ अम्मा ईन लोगों ने हमारी पवित्रता का उल्लंघन किया है, ऐ अम्मा, अल्लाह की क़सम है के इनलोगों ने मेरे बाबा की ह्त्या की है!" उनहोंने जवाब दिया, "ऐ मेरी प्यारी सकीना, अल्लाह के वास्ते चुप होजा, तेरे ब्यान ने मेरे जिगर को जला दिया और दिल के टुकड़े टुकड़े कर दिए! यह तेरे बाबा का कुर्ता है जो मैंने अपने पास हिफाज़त से उस दिन के लिए रख़ा हुआ है, जिस दिन में अल्लाह से मिलूंगी!" फिर मैं अपनी नींद से जागी और चाहा कीइस ख़्वाब को छिपा लूं, लेकिन फिर मैंने अपने इस ख़्वाब को अपने नजदीकी रिश्तेदारों में ब्यान कर दिया!" और इस प्रकार से यह ख्वाब हम लोगों तक पहुंचा है" ( किताब नफ्सुल महमूम से लिया गया)

ज़्यारत सैयेदाह सकीना (स:अ)

अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते रसूलिल्लाहे, अस्सलामो  अ’लयके  या बिन्ते  सुल्तानिल अमबिया-इ, अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते साहेबिल हव्ज़े वल-लेवा-इ अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते मन अ’रजा इलस समा-इ व वासला  इला  काबा  कौ'सय्ने औ अदनाअस्सलामो अ’लयके या बिन्ते नाबिय्यिल होदा व सय्येदिल  वरा  व मूनक़ेज़िल इ’बादी  मे'नज़  ज़लालते वर-रदा, अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते  अक्रमिल आ’लमीना हसाबन व अफ़'ज़लेहिम   नसाबन व अज्मलेहीम मन'ज़रन व अस-ख़ाहुम कफ़'फ़न व अश-जा-ऐ’हिम  क़ल'बन व अक्मलेहीम  हिलमन व  अक्सरेहीम इलमन व अस्बतेहीम असलन व आ-आलाहुम ज़िकरन व  अस्नाहुम  ज़ुखरन व अहमदहुम वसफ़न अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते बहरिल ऊ’लूमे व कहफ़िल फ़ो'क़रा-इ अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते मन वोलेदा फ़िल का’बते व ज़ुव्वेजा फ़ीस समा-इअस्सलामो अ’लयके या बिन्ते सुल्तानिल औसेया-इ व सय्येदिल अव्लेया-इ, अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते सारिल्लाहे वन्बे सारेही अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते सय्येदिश शो-हदा-इ अस्सलामो अ’लयके या बज़-अ’ते सय्येदे शबाबे अहलिल जन्नते अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते फातेमताज़ ज़हरा-इ सय्येदते नेसा-इल अ’अलामीना अस्सलामो अ’लयके या बिन्ते खदी'जतिल कुबरा उम्मिल मोमिनीना अस्सलामो अ’लयके या सकी'नता बीनता उम्मे रबाबिन व रहमतुल्लाहे व बरकातोहू अस्सलामो अ’लयके अय्यातोहत तक़ी'यतुन  नक़ी'यतो अस्सलामो अ’लयके अय्यातोहल  फाज़ेलतुस सग़ीरतो अस्सलामो अ’लयके अय्यातोहल  करीमतुल बही'यतो अस्सलामो अ’लयके अय्यातोहल  मज़्लूमा'तुष  शही'दतो अस्सलामो अ’लयके अय्यातोहल  बा-इ’इदतो अ’नील अव्ताने अस्सलामो अ’लयके अय्यातोहल  असीरतो फ़िल-बुल्दाने अस्सलामो अ’लयके या मुम्ता'हनातो बे-इम्तेहानिल अज़ी'माते वस फ़-दा-हां नफ्सहा ले-अबीहा व वारीदहा अस्सलामो अ’ला मम माता मिन शिद'दतिश शौक़े फ़ी महाब्बते सय्येदिश शोहादा-इ व क़ामत क़ेयामतों अहलिल बय्ते बे-मोतेहा फ़ी ख़रा'बतिश शामे व हेय  मौ'ज़ेअल  मुम्ताहना'तेवल  बला-इ, अस्सलामो अ’ला मल लाहेक़त इला जद'देहा व अबीहा फ़ी दारिल करीमाते व लील-लेक़ा-इ व रह'मतुल्ल्लाहे व बरकातोहू
अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद व आले मुहम्मद
ज़्यारत
हमारा सलाम हो इमाम हुसैन (अ:स) की छोटी शहज़ादी पर !!
हमारा सलाम हो आप पर, ओ अमीरुल मोमेनीन अली (अ:स) की पोती 
हमारा सलाम हो आप पर, ओ उज्ज्वल बीबी फातिमा (स:अ) की पोती
हमारा सलाम हो आप पर, ओ मज़लूमे कर्बला हुसैन (अ:स) की बेटी
हमारा सलाम हो आप पर, ओ अब्बास अलमदार की भतीजी
हमारा सलाम हो आप पर, ओ बीबी ज़ैनब (स:अ) की भतीजी
हमारा सलाम हो आप पर, ओ अली ज़ैनुल-आबेदीन (अ:स) की बहन
हमारा सलाम हो आप पर, ओ महान, आलिशान वंशों वाली
हमारा सलाम हो आप पर, ओ पवित्र और पाक वाली
हमारा सलाम हो आप पर, ओ छोटी मज़्लूमाह 
हमारा सलाम हो आप पर, ओ अत्याचार को सहने वाली, ज़ुल्मों को बर्दाश्त करने वाली
हमारा सलाम हो आप पर, ओ जिस को क़ैदी बनाया गया
हमारा सलाम हो आप पर, ओ जिस को अपने घर से दूर दफ़न किया गया
हमारा सलाम हो आप पर, ओ जो उजाड़ कोठरी से बाहर न आ सकी
हमारा सलाम हो आप पर, ओ हाशमी क़बीले की शहज़ादी
हमारा सलाम हो आप पर, ओ बीबी सकीना बीनते अल-हुसैन (अ:स)
हमारा सलाम हो आप पर, और अल्लाह आप को प्रचुर मात्रा में शांती दे और आशीर्वाद प्रदान करे
अल्लाह के चुने हुए ख़ास आशीर्वाद मुहम्मद (स:अ:व:व) और उनकी पवित्र संतान के लिए हैं!
अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद व आले मुहम्मद
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