अपने लिये और अपने दोस्तों के लिये इमाम सज्जाद अस की दुआ ( सहीफ़ ऐ सज्जदिया पांचवी दुआ |

अपने लिये और अपने दोस्तों के लिये इमाम सज्जाद अस की दुआ ( सहीफ़ ऐ सज्जदिया पांचवी दुआ | बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम ऐ वह जिसक...



अपने लिये और अपने दोस्तों के लिये इमाम सज्जाद अस की दुआ ( सहीफ़ ऐ सज्जदिया पांचवी दुआ |

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम


ऐ वह जिसकी बुज़ुर्गी व अज़मत के अजाएब ख़त्म होने वाले नहीं। तू मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर रहमत नाज़िल फ़रमा और हमें अपनी अज़मत के परदों में छुपाकर कज अन्देशियों से बचा ले।

 ऐ वह जिसकी शाही व फ़रमाँरवाई की मुद्दत ख़त्म होने वाली नहीं तू रहमत नाज़िल कर मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और हमारी गर्दनों को अपने ग़ज़ब व अज़ाब (के बन्धनों) से आज़ाद रख। 

ऐ वह जिसकी रहमत के ख़ज़ाने ख़त्म होने वाले नहीं। रहमत नाज़िल फ़रमा मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और अपनी रहमत में हमारा भी हिस्सा क़रार दे। 

ऐ वह जिसके मुशाहिदे से आँखें क़ासिर हैं, रहमत नाज़िल फ़रमा मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और अपनी बारगाह से हमको क़रीब कर ले। 

ऐ वह जिसकी अज़मत के सामने तमाम अज़मतें पस्त व हक़ीर हैं, रहमत नाज़िल फ़रमा मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और हमें अपने हाँ इज़्ज़त अता कर। 

ऐ वह जिसके सामने राज़हाए सरबस्ता ज़ाहिर हैं रहमत नाज़िल फ़रमा मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और हमें अपने सामने रूसवा न कर। 

बारे इलाहा! हमें अपनी बख़्शिश व अता की बदौलत बख़्शिश करने वालों की बख़्शिश से बेनियाज़ कर दे और अपनी पोस्तगी के ज़रिये क़तअ ताअल्लुक़ करने वालों की बेताअल्लुक़ी व दूरी की तलाफ़ी कर दे ताके तेरी बख़्शिष व अता के होते हुए दूसरे से सवाल न करें और तेरे फ़ज़्ल व एहसान के होते हुए किसी से हरासाँ न हों। 

ऐ अल्लाह! मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर रहमत नाज़िल फ़रमा और हमारे नफ़े की तदबीर कर और हमारे नुक़सान की तदबीर न कर और हमसे मक्र करने वाले दुश्मनों को अपने मक्र का निशाना बना और हमें उसकी ज़द पर न रख। और हमें दुश्मनों पर ग़लबा दे, दुश्मनों को हम पर ग़लबा न दे। 

बारे इलाहा! मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर रहमत नाज़िल फ़रमा और हमें अपने नाराज़गी से महफ़ूज़ रख और अपने फ़ज़्ल व करम से हमारी निगेहदाश्त फ़रमा और अपनी जानिब हमें हिदायत कर और अपनी रहमत से दूर न कर के जिसे तू अपनी नाराज़गी से बचाएगा वही बचेगा। और जिसे तू हिदायत करेगा वही (हक़ाएक़ पर) मुत्तेलअ होगा और जिसे तू (अपनी रहमत से) क़रीब करेगा वही फ़ायदे में रहेगा। 


ऐ माबूद! तू मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर रहमत नाज़िल फ़रमा और हमें ज़माने के हवादिस की सख़्ती और शैतान के हथकण्डों की फ़ित्ना अंगेज़ी और सुलतान के क़हर व ग़लबे की तल्ख़ कलामी से अपनी पनाह में रख। बारे इलाहा! बेनियाज़ होने वाले तेरे ही कमाले क़ूवत व इक़्तेदार के सहारे बे नियाज़ होते हैं। रहमत नाज़िल फ़रमा मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और हमें बेनियाज़ कर दे और अता करने वाले तेरी ही अता व बख़्शिश के हिस्सए दाफ़र में से अता करते हैं। 


रहमत नाज़िल फ़रमा मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और हमें भी (अपने ख़ज़ानए रहमत से) अता फ़रमा। और हिदायत पाने वाले तेरी ही ज़ात की दर की दरख़्शिन्दगियों से हिदायत पाते हैं। रहमत नाज़िल फ़रमा मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और हमें हिदायत फ़रमा। 

बारे इलाहा! जिसकी तूने मदद की उसे मदद न करने वालों का मदद से महरूम रखना कुछ नुक़सान नहीं पहुंचा सकता और जिसे तू अता करे उसके हाँ रोकने वालों के रोकने से कुछ कमी नहीं हो जाती। और जिसकी तू ख़ुसूसी हिदायत करे उसे गुमराह करने वालों का गुमराह करना बे राह नहीं कर सकता। रहमत नाज़िल फ़रमा मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और अपने ग़लबे व क़ूवत के ज़रिये बन्दों (के शर) से हमें बचाए रख और अपनी अता व बख़्शिश के ज़रिये दूसरों से बेनियाज़ कर दे और अपनी रहनुमाई से हमें राहे हक़ पर चला। 

ऐ माबूद! तू मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर रहमत नाज़िल फ़रमा और हमारे दिलों की सलामती अपनी अज़मत की याद में क़रार दे और हमारी जिस्मानी फ़राग़त (के लम्हों) को अपनी नेमत के शुक्रिया में सर्फ़ कर दे और हमारी ज़बानों की गोयाई को अपने एहसान की तौसीफ़ के लिये वक़्फ़ कर दे ऐ अल्लाह! तू रहमत नाज़िल फ़रमा मोहम्मद (स0) और उनकी आल (अ0) पर और हमें उन लोगों में से क़रार दे जो तेरी तरफ़ दावत देने वाले और तेरी तरफ़ का रास्ता बताने वाले हैं और अपने ख़ासुल ख़ास मुक़र्रेबीन में से क़रार दे ऐ सब रहम करने वालों से ज़्यादा रहम करने वाले।



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