इमाम ने की प्याए की मदद |

दाऊद रिक़्की फ़रमाते हैं कि मेरे दो भाई हज के लिए गए रास्ते में मेरा एक भाई बहुत अधिक प्यासा हो गया, और संयोग से उसके पास पानी ...





दाऊद रिक़्की फ़रमाते हैं कि मेरे दो भाई हज के लिए गए

रास्ते में मेरा एक भाई बहुत अधिक प्यासा हो गया, और संयोग से उसके पास पानी भी नहीं था, उसकी प्यास इतनी अधिक बढ़ गई की वह अपनी सवारी पर बैठ ना सका और गधे से गिरकर मूर्छित हो गया।

मेरे दूसरे भाई ने इधर उधर पानी तलाश किया लेकिन कही पानी ना मिल सका। हर तरफ़ से निराश हो कर दूसरे भाई ने दो रकअत नमाज़ पढ़ी और ईश्वर को मोहम्मद और उनकी आल का वास्ता दिया फिरा बारी बारी एक एक इमाम का वास्ता देना आरम्भ किया और अंत में इमामे ज़माना (अ) का बार बार वास्ता देने लगा।

इसी बीच एक आदमी प्रकट हुआ और उसने कहाः तुम्हारा भाई ज़मीन पर क्यों लेटा हुआ है?

उसने उत्तर दियाः यह प्यास के कारण मूर्छित हो कर गिर पड़ा है।

उस आने वाले व्यक्ति ने एक छोटी सी लकड़ी दी और कहाः इसे अपने भाई के होंटों पर फेर दो।

मेरे भाई ने वह लकड़ी लेकर उसके होंठों पर फेर दी।

थोड़ी देर के बाद भाई होश में आ गया और दोने चल पड़े।

अपना हज पूरा करने के बाद वह अपने घर कूफ़ा आए।

फिर कुछ समय के बाद मेरा एक भाई इमाम सादिक़ (अ) की ज़ियारत के लिए मदीना गया तो इमाम ने फ़रमायाः तुम अपने भाई के बारे में बताओ उसका क्या हाल है और यह बताओ कि वह लकड़ी कहां है?

मेरे भाई ने कहाः मौला जब मेरा भाई होश में आया तो मैं इतना अधिक प्रसन्न हो गया कि लकड़ी उठानी मुझे याद ही नहीं रही

आपने फ़रमायाः जब तू अपने भाई के कारण बहुत अधिक चिंतित था तो उस समय मैंने हज़रत ख़िज़्र (अ) को तूबा वृक्ष की वह लकड़ी दे कर तुम्हारे पास भेजा था।

फिर आपने अपने दास से कहाः चमड़े वाला थैला लाओ।

दास थैला ले कर आया तो आपने उसमें से वह लकड़ी निकाल कर दिखाई और फ़रमायाः

यह वह लकड़ी है जो तूबा वृक्ष से ली गई है और यही लकड़ी तूने अपने भाई को होठों पर फिराई थी।

फिर आपने वह लकड़ी दोबारा थैले में रख दी।

(बिहारुल अनवार, जिल्द 11 पेज 144, पंदे तारीख़ से लिया गया, पेज 99- 100)


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