अल्लाह को पहचानो कुरान से |

अल्लाह को पहचानो कुरान से | ईश्वर एक ऐसा शब्द है जो जहन में आते ही एक बहूत ही महान वक्तित्व की कल्पना जहन में आता है जो हर वस्तु का स...


अल्लाह को पहचानो कुरान से |

ईश्वर एक ऐसा शब्द है जो जहन में आते ही एक बहूत ही महान वक्तित्व की कल्पना जहन में आता है जो हर वस्तु का स्वामी और पालणपोषक हो। उसने हर वस्तु को एकेले ही उत्पन्न किया हो,  पूरे संसार को चलाने वाला वही हो, धरती और आकाश की हर चीज़ उसके आज्ञा का पालन करती हो, अपनी सम्पूर्ण विशेषताओं और गूनों में पूर्ण हो, जिसे खाने पीने की आवशक्ता न हो, विवाह और वंश तथा संतान की ज़रूरत न हो  तो केवल वही ज़ात उपासना के योग्य होगी और केवल वही इबादत की हक्दार होगी।अल्लाह तआला ही केवल वह ज़ात है जो सब गूनों और विशेषताओं में पूर्ण है। अल्लाह तआला की कुछ महत्वपूर्ण विशेषता पवित्र क़ुरआन की इन आयतों में बयान की गई हैं।
  • अल्लाह अकेला है, सबसे बेनियाझ (बेपरवाह) है, न उसकी कोई औलाद है और न वह किसीकी औलाद है, कोई उसके जैसाभी नहीं (इखलास:१-४)
  • वह (अल्लाह) हंमेशा जिन्दा रहेनेवाला है. कायम है, सबका थामने वाला है. वह न ऊँघता है और नाही उसे नींद आती है. आसमानों और जमीन में जो कुछ है सब अल्लाह ही का है. कोई उसकी इजाजत के बगैर उसके सामने सिफ़ारिश भी नहीं कर सकता. उसे हर चीजका इल्म (ज्ञान) है. उसकी खुर्सी (सिंहासन) ने सब आसमानों और जमीनोंको अपने घेरेमें ले रखा है. कायनातका निझाम चलानेमें उसे थकान भी नहीं होती. (बकराह:२५५)
  • उसीने हमें पैदा किया है, वोही हमारा खालिक (पैदा करनेवाला) है. (जुखरुफ़:८७)
  • उसीने सातो आसमान और जमीनोंको पैदा किया, वोही सब पर ग़ालिब है और सबसे ज्यादा इल्म (ज्ञान) वाला है. (लुकमान:२५, झूमर:३८)
  • वही आसमानसे पानी बरसाता है (अनकबूत:६३)
  • रात और दिन, सूरज और चंद उसीकी निशानियोमें से है (फुसिलत:३७)
  • वही जमीन और आसमानसे रोजी देनेवाला है और वोही हमारी आँखों और कानो का मालिक है (युनुस:३१)
  • जमीन और जो कुछ जमीनमे है सबका वही मालिक है. सातो आसमानों और अर्श का भी वही मालिक है. कोई उसके मुकाबलेमें पनाह (शरण) नहीं दे सकता. (मुअमिन:८५-८९)
  • उसीने हमें एक जान आदम (अ.स.)से पैदा किया, उसीसे उसका जोड़ा भी बना दिया फिर उनदोनो से बहुतसे मर्द और औरतें बना कर दुनियामें फैला दिए. (निशा:१, नहल:७२)
  • उसीने हमें एक मर्द और औरतसे पैदा किया, फिर खानदान और कबीलेवाला बना दिया ताकि हम एक दूसरेको पहेचान सके. उसके नदजिक हममे ज्यादा इज्जतवाला वोह है जो उससे ज्यादा डरनेवाला है. (हुजुरात:१३)
  •  उसीने हमें मिट्टीसे पैदा किया और जमीनमें फैला दिया (रूम:२०)
  • उसीने मिट्टी, फिर मनी (वीर्य) से लोथड़ा, फिर गोश्त व हड्डी और फिर सूरत बनायी (मुअमिनुम:१२-१४,   गाफिर:६७, कयामा:३७-३९)
  • उसीने हर जानदारको हकीर पानीसे पैदा किया (नूर:४५,फुरकान:५४, सजदा:८, यासीन:७७)
  • उसीने इंसान को सनसनाते सड़े हुए सादे गारे से पैदा किया (हिज्र:२६, हज्ज:५, सजदा:७)
  • उसीने हमारी सूरते बनायीं (अच्छी और जैसी चाही) (आले इमरान:६, गाफिर: ६४, हश्र:२४, तगाबुन:३)
  • उसीने जिन्नो को आग से पैदा किया (आराफ:१२, हिज्र:२७, सुआद:७६, रहमान:१५)
  • उसीने हमारे जोड़े बनाने को औरते पैदा की ताकि उससें चैन और राहत पा सके (रूम:२१)
  • वही जिसे चाहता है बेटियाँ देता है और जिसे चाहता है बेटे देता है. जिसको चाहे बेटे-बेटियां मिलाकर देता है और जिसे चाहता है बाँझ रखता है. (शुरा:४९-५०)
  • उसी ने जमीं कि सारी चीजे हमारे लिए पैदा कि (बकरह:२९)
  • जब कोई पुकारने वाला उसे पुकारता है तो वह उसकी दुआ सुनता और कुबूल करता है (बकरह:१८६)
  • वही जिसे चाहे बादशाही दे और जिससे चाहे छीन ले. जिसको चाहे इज्जत दे और जिसे चाहे जलील करे. वह हर चीज पर कुदरत रखता है. (आले इमरान:२६)
  • उसका इल्म हर चीज को अपने घेरे में लिए हुए है (आराफ:८९, ताहा:९८)
  • सिर्फ उसी को आसमानों और जमीं कि छिपी चीजों (गैब) का इल्म है (हूद:१२३)
  • वोह हर एब से पाक है, उसी ने अपने बंदे मुहम्मद (स.अ.व.) को रातों-रात अदब वाली मस्जिद (मस्जिदे हराम) से मस्जिदे अक्सा तक सैर करा दी. वह सब कुछ देखने-सुनने वाला है. (इसरा:०१)
  • उसीने हर चलने-फिरने वाले जानदार को पानी से पैदा किया, जिनमे से कुछ दो पांवो पर तो कुछ चार पांवो पर चलते है (नूर:४५)
  • उसके सिवाए कोई नहीं जानता कि (क) क़यामत कब आएगी (वाकेअ होगी)? (ख) बारिश कब, कहाँ और कितनी होगी? (ग) औरत के पेट में क्या और कैसा है? (घ) कौन कब मरेगा और कहाँ किसे मौत आएगी? (च) कौन कल क्या करेगा? (लुकमान:३४)
  • उसी ने हर जानदार का जोड़ा बनाया (यासीन:३६, जरियात:४९, अनआम:३८)
  • वह जिसे चाहता है ज्यादा रोजी देता है और जिसके लिए चाहता है रोजी तंग कर देता है (बकरह:२४५, सबा:३६,३९, रूम:३७)
  • सच्ची तौबा करने पर वह सब गुनाहों को माफ़ कर देता है (जुमर:५३)
  • उसी ने आसमान व जमीन को हिक्मत से पैदा किया ताकि हर शख्स अपने आमाल का बदला पाए (जसिया:२२)
  • उसी ने मौत और जिन्दगी को पैदा किया ताकि हमारी आजमाइश करे कि कौन हम में अच्छे अमल करने वाला है. (हूद:७, कहफ़:७, मुल्क:२, इन्सान:२)
  • वही जानदार से बे-जान और बे-जान से जानदार को पैदा करने वाला है (आले-इमरान:२७, अनआम:९५, युनुस:३१, रूम:१९)
  • हमारे दिल में जो ख्यालात आते है, वह उन्हें भी जानता है (काहफ:१६)
  • उसीने हमारे कान, आँख और दिल बनाये (नहल:७८, मुअमिनून:७८, सजदा:९, मुल्क:२३)
  • उसी ने हमारी जुबानो और रंगों को जुदा जुदा बनाया (रूम:२०)
  • उसी ने आसमानों को सतूनो के बगैर गण्य और जमीन पर पहाडो को रख दिया फिर जमीन पर कई तरह के जानवरो को फैला दिया (लुकमान:१०)
  • उसीने चाँद को नूर और सूरज को चिराग बनाया (युनुस:५, नूह:१६)
  • वही रात को दिन में दाखिल करता है और दिन को रात में, चाँद और सूरज को उसीने हमारे लिए काम पर लगा रखा है (लुकमान:२९)
  • उसी ले हुक्म से रात और दिन बदल-बदल कर आते है (आले इमरान:१९०, जासिया:५)
  • उसी ने हमारे लिए चौपाए (जो चरने वाले है) खाने के लिए हलाल किये (माईदा:१, नहल:५, मुअमीनून:२१)
  • वही हमें खौफ़ और उम्मीद दिलाने के लिए बिजली चमकाता है. वही आसमान से पानी बरसाता है और मुर्दा जमीन को जिन्दा करता है (रूम:२४)
  • सबको फ़ना (खत्म) होना है सिवाय उस एक अकेले अल्लाह कि, उसी कि जात बाकी रहने वाली है (रहमान:२६-२७, कसस:८८)
  • वह सलामती के घर जन्नत कि तरफ बुलाता है, और जिसे चाहता है सीधा रास्ता दिखाता है (युनुस:२५)
  • वह अगर चाहता तो सबको एक ही जमाअत कर देता लेकिन वह जनता है कि लोग हंमेशा इख्तिलाफ करते रहेंगे (हूद:११८)
  • जो उसकी तरफ रुजू करता है वह उसे अपनी तरफ का रास्ता दिखाता है (रअद:२७, शुरा:१३)
  • वह कभी वादा खिलाफी नहीं करता (रूम:६, जुमर:२०)
  • उस से भूल चूक भी नहीं होती (मरियम:६४, ताहा:५२)
  • वह हमेशा से है और हमेशा रहने वाला है (बकरह:२५५, आले इमरान:२)
  • वही जिन्दगी और मौत देने वाला है (मुअमिनूम:६८)
  • वही नफे और नुकसान का मालिक है (फतह:११)
  • उसी के इख्तियार (बस) में हिदायत देना है (कसस:५६)
  • वही सहत (तंदुरस्ती) और शिफा (बीमारी दूर करना) देनेवाला है (शोअरा:८०)
  • वही दिलो को फैरनेवाला है (अनफ़ाल:२४)
  • उसी के हाथ में दिन और दुनिया कि सारी भलाईया है (आले इमरान:२६)
  • वह हर जगह और जर वकत (अपनी कुदरत और इल्म के ऐतेबार से) हाजिर (मौजूद) होता है (हदीद:४)
  • उसी के हुक्म से क़यामत के दिन पहाड़ उसते फिरेंगे (नमल:८८, वाकिया:६, मुजम्मिल:१४)
  • वही क़यामत के दिन जजा या सजा देगा (तहरिम:१०)
  • उसका दीदार करना दुनिया (कि जंदगी में) किसी के लिए मुमकिन हाही (अनआम:१०३, आराफ:१४३)
  • सिर्फ उसी को गैब (छिपी बात) का इल्म है (माईदा:१०९,११६, अनआम:५९, आराफ:१८८, तौबा:७८, युनुस:२०, हूद:१२३, नमल:६५, सबा:३,४८, जिन्न:२६)
  • वह (हर जगह नहीं बल्कि) अर्श पर मुस्तवी (बिराजमान) है ( आराफ:५४, युनुस:३, रअद:२, ताहा:५, फुर्क़ान:५९, सजदा:४, हदीद:४)
  • क़यामत कब आएगी? यह भी सिर्फ वही जानता है ( आराफ:१८७, ताहा:१५, लुकमान:३४, अहजाब:६३, फुसिलत:६७, जुखरुफ़:८५, मुल्क:२६, जिन्न:२५, नाजिआत:४४)
  • शिफाअत (सिफ़ारिश) का हक उसके सिवाए किसी के पास नहीं (बकरह:२५५, रूम:१३, सजदा:४, जुमर:४४, जुखरुफ़:८६)
  • वह किसी शख्स को उसकी ताकत (बर्दाश्त) से ज्यादा तकलीफ नहीं देता (बकरह:२३३,२८६, अनआम:१५२, आराफ:४२, स्रुः मुअमिनून:६२)
  • उसके सिवाए कोई मुश्किल कुशा (दूर करने वाला) नहीं (बकरह:१०७, आले-इमरान:१६०, अनआम:१७, आराफ:३७, युनुस:१०६,१०७, रऊद:१४,३७, जिन्न:२०)
  • उसके सिवाए किसीको भी मदद के लिए पुकारना शिर्क है (नहल:८६, हज्ज:७३, फुर्क़ान:२,३, गाफिर:१२,२०, फुसिलत:४७,४८)
  • वह दिलो के भेद (राज) जानने वाला है (आले इमरान:१५४,१६७, निसा:६३, माइदा:७, अनफ़ाल:४३, हूद:५, लुकमान:२३, शुर:२४, हदीद:६, तगाबुन:४, मुल्क:१३)
  • कायनात कि हर चीज (आसमानों में हो या जमीन में या जमीन के निचे) सब उसी कि तस्बीह (पाकी) बयां करती है (नहल:४९, इसरा:४४, हज्ज:१८, नूर:४१, हशर:१, सफ्फ:१, जुमुआ:१)
  • वह अपने इल्म के ऐतेबार से हर जगह है (अनआम:८०, सुरहआराफ:८९, ताहा:९८, गाफिर:७, फुसिलत:५४, तलाक:१२)
  • वह हर बात (चीज) से बाखबर है (बकरह:२९,२३१, निसा:१७६, माइदा:९७, नूर:३५,६४)
  • वह हर शै (चीज) पर कादिर (कुदरत रखता ) है (बकरह:२०,१०६,१४८,२५९,२८४, आले इमरान:२६,२९,१६५,१८९, माइदा:१९,४०,१२०, अनआम:१७, अनफ़ाल:४१, तौबा:३९, हूद:४, नहल:७७, नूर:४५)
  • उसने कायनात छह (६) दिनों में बने (आराफ:५४, युनुस:३, हूद:७, फुर्क़ान:६९, सजदा:४, कॉफ:३८, हदीद:४)
  • उसीके हुक्म से चाँद और सूरज फ़िजा मै तैर (घूम) रहे है (रअद:२, इब्राहीम:३३, अम्बिया:३३, लुकमान:२९, फातिर:१३, यासीन:४०, जुमर:५, रहमान:५)
  • उसी ने जमीन को फर्श बनाया ( अम्बिया:५६, नूह:१९, नबअ:६, नाजिआत:३०)
  • उसी ने जमीन को बिछौना और आसमान को छत बनाया (बकरह:२२, गाफिर:६४)
  • उसने कायनात को तदबीर से पैदा किया ( रूम:८, सुआद:२७, जुमर:५, दुखान:३९, जासिया:२२,अह्काफ:३, तगाबुन:३)
  • उसी ने हुक्म दिया कि इबादत सिर्फ उसी कि की जाए (इसरा:२३, जुमर:२, जरियात:५६, बय्यिन:५)
  • उस कि दी हुई नेअमते वेशुमार है अगर हम उन्हें गिनना चाहे तो गिन ही नहीं सकते (इब्राहीम:३४, नहल:१८)
प्रतिक्रियाएँ: 

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  1. सबका मालिक एक अल्लाह है. उसके बारे में सबसे सही जानकारी उसी की वाणी से मिल सकती है.

    अच्छी पोस्ट है.

    शुक्रिया.

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