ज़हूर की पाँच अलामतें

ज़हूर की पाँच अलामतें यनाबीउल मवद्दत में क़ंदूज़ी ने अबू अमामा से रिवायत की वह बयान करता है कि आँ हज़रत(स) ने हमसे ख़िताब करते हुए दज्जाल का...

ज़हूर की पाँच अलामतें
यनाबीउल मवद्दत में क़ंदूज़ी ने अबू अमामा से रिवायत की वह बयान करता है कि आँ हज़रत(स) ने हमसे ख़िताब करते हुए दज्जाल का तज़किरा किया और फ़रमाया: मदीने से गंदगी को इस तरह दूर करेगा जिस तरह माद्दा लोहे की खोट को दूर करता है। पस उम्मे शरीक ने रसूलल्लाह(स) से अर्ज़ की या रसूलल्लाह उस रोज अरब कहाँ होगें

महदी(अ.) के ज़हूर के बारे में अबू अब्दिल्लाह हुसैन इब्ने अली (अ.) से रिवायत की गयी, इमाम ने फ़रमाया: महदी के ज़हूर की पाँच अलामतें हैं:

1-     सुफ़यानी का ख़ुरुज
2-     यमानी
3-     आसमान से आवाज़ आना।
4-     मक़ामे बैदा में तबाही।
5-     नफ़्से ज़किय्या का क़त्ल होना।[23]
यनाबीउल मवद्दत में क़ंदूज़ी ने अबू अमामा से रिवायत की वह बयान करता है कि आँ हज़रत(स) ने हमसे ख़िताब करते हुए दज्जाल का तज़किरा किया और फ़रमाया: मदीने से गंदगी को इस तरह दूर करेगा जिस तरह माद्दा लोहे की खोट को दूर करता है। पस उम्मे शरीक ने रसूलल्लाह(स) से अर्ज़ की या रसूलल्लाह उस रोज अरब कहाँ होगें¿ आपने इरशाद फ़रमाया: उस रोज़ अरब बहुत कम होगें, और सबके सब बैतुल मुक़द्दस में होगें। और उनका इमाम महदी(अ) होगा।
आख़री ज़माने में इमाम महदी की अलामत के बारे में अबी जाफ़र से रिवायत की गयी इमाम ने फ़रमाया: इमाम महदी रोज़े आशूरा ज़हूर फरमायेगें और यह वहीरोज़ है जिस दिन इमाम हुसैन(अ) शहीद हुए, दसवीं मुहर्रम थी और हफ़्ते का दिन था, महदी रुक्न व मक़ाम के दरमियान खड़े होगें दाहिनी जानिब जिबरईल(अ) और बाँये जानिब मीकाईल होगें। ज़मीन के हर गोशे से आपके शिया बैअत के लिये जमा हो जायेगें। आपके शियों के लिये ज़मीन सिमट जायेगी। आप ज़मीन को अदल व इंसाफ़ से भर देगें जिस तरह वह ज़ुल्म व जौर से भरी होगी।
महदी(अ)के शियों के लिये ज़मीन की तनाबें सिमट जायेंगी। क़ुदरते ख़ुदा से ज़मीन के गोशे गोशे से लोग चंद लम्हात के अंदर मक्के में जमा हो जायेगें।[24]
हाकिमनेशापुरीकीमुस्तदरकअलससहीहैनमें अबू सईद ख़िदरी बयान करते हैं रसूलल्लाह(स) ने इरशाद फऱमाया: मेरी उम्म्त के आख़री(ज़माने) में महदी ज़हूर करेगा। ख़ुदा वंदे आलम उसको बारिशों से सैराब फ़रमायेगा। और ज़मीन अपने नबातात को ज़ाहिर कर देगी, अमवाल की सहीह तक़सीम करेगा, जानवरों की कसरत होगी और उम्मते इस्लामिया साहिबे अज़मत होगी।
हाकिम नेशापुरी की मुस्तदरक अलस सहीहैन में पैग़म्बरे इस्लाम(स) से रिवायत की गयी है, हज़रत ने फ़रमाया: मेरी उम्मत से महदी होगा, (जिस की हुकुमत) कम अज़ सात(साल) वर्ना नौ(साल) होगी। उसके ज़माने में मेरी उम्मत पर इस क़दर नेमतें नाज़िल होगीं जिस से कब्ल इस तरह नेमतों का नुज़ूल न हुआ होगा। ज़मीन खाने की तमाम चीज़ें अता करेगी जिसकी लोगों से ज़ख़ीरा अंदोज़ी न की जायेगी। उस रोज़ माल जमा होगा एक शख़्स खड़ा होगा और कहेगा इस माल को ले लो।
यनाबीउल मवद्दत में अबी ख़ालिद अलकाहिल ने इमाम जाफ़र सादिक़(अ)से अल्लाह तआला के इस क़ौल
فَاسْتَبِقُواْ الْخَيْرَاتِ أَيْنَ مَا تَكُونُواْ يَأْتِ بِكُمُ اللّهُ جَمِيعًا
(पस नेकीयों में जल्दी करो, तुम जहाँ भी होगे अल्लाह तुम सब को ले आयेगा।) की रिवायत की गयी है आपने फ़रमाया: आयत से क़ायम(अ) के असहाब मुराद हैं। जिनकी तादाद 313 होगी। ख़ुदा की क़सम उम्मते मअदूदह से यही लोग मुराद हैं यह सब लोग मौसमे ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश की तरह एक लम्हे में जमा हो जायेगें।
यनाबीउल मवद्दत में अल्लाह के इस क़ौल
ولئن اخرنا عنهم العزاب الی امةمعدودة
के बारे में रिवायत बयान की गयी रावी बयान करता है उम्मते मअदूदह से महदी के असहाब मुराद हैं जो आख़री ज़माने में होगें जिनकी तादाद 313 होगी। जिस तरह बद्र में रसूलल्लाह (स) के असहाब की तादाद 313 थी। सबके सब एक लम्हे में ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश की तरह जमा हो जायेगें।
तारिख़े इब्ने असाकर (शाफ़ेई) मेंइस तरह रिवायत की गयी है जिस वक़्त क़ायमें आले मुहम्मद(अ) ज़हूर फ़रमायेगें पस ख़ुदा वंदे आलम मशरिक़ व मग़रिब वालों को इस तरह जमा फ़रमायेगा जिस तरह मौसमे ख़रीफ़ की तेज़ व तुन्द बारिश होती है। चुनाँचे महदी के रोफ़क़ा अहले कूफ़ा से और अबदाल अहले शाम से होगें।[25]
यनाबीऊल मवद्दत मेंअल्लाह तआला के इस क़ौल
اعلموا ان الله یحی الارض بعد موتها
समझ लो कि ख़ुदा ज़मीन को ज़िन्दा करता है बाद इसके कि उसकी मौत वाक़े हो चुकी हो।, के बारे में सलाम बिन मुसतनीर के वास्ते से इमाम बाक़िर(अ) से रिवायत की गयी, इमाम ने फ़रमाया: (ख़ुदावंदे आलम) क़ायम के सबब ज़मीन को ज़िन्दा फ़रमायेगा जो कि ज़ुल्म के सबब से मुर्दा हो चुकी होगी और आप अपने अदल के ज़रीये उसको ज़िन्दा फ़रमायेगें।
यनाबीऊल मवद्दत में अल्लाह तआला के इस क़ौल
وَإِن مِّنْ أَهْلِ الْكِتَابِ إِلاَّ لَيُؤْمِنَنَّ بِهِ قَبْلَ مَوْتِهِ وَيَوْمَ الْقِيَامَةِ يَكُونُ عَلَيْهِمْ شَهِيدًا
और अहले किताब में यक़ीनन उस पर ईमान लायेगें अपनी मौत से क़ब्ल और क़ियामत के दिन उन पर गवाह होगा।
(सूरह निसा आयत 159)
रावी बयान करता है क़ियामत से क़ब्ल ईसा(अ) नाज़िल होगें, उस वक़्त यहूदी और ग़ैर यहूदी कोई बाक़ी न रहेगा मगर सबके सब अपने इन्तेक़ाल से क़ब्ल(महदी) पर ईमान ले आयेगें। और ईसा(अ) इमाम महदी(अ) की इमामत में नमाज़ अदा करेगें।
तज़किरातुल ख़वास में सिब्ते इब्ने जौज़ी(अलहनफ़ी) बयान करता है कि सदयी बयान करता है कि महदी(अ) और ईसा(अ)(एक मक़ाम पर) जमा होगें। पस जब नमाज़ का वक़्त होगा, इमाम ईसा से फ़रमायेगें आप नमाज़ पढ़ायें लेकिन ईसा फ़रमायेंगें आप नमाज़ के लिये ज़्यादा बेहतर हैं पस ईसा इमाम महदी के साथ मामूम की हैसियत से नमाज़ पढ़ेंगें।
इमामकाक़ितालहक़परहोगा।
सही मुस्लिम में जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह अंसारी बयान करते हैं कि मैंने आँ हज़रत (स) को फ़रमाते सुना: मेरी उम्मत का एक गिरोह इज़हारे हक़ के लिये क़ियामत तक जंग करता रहेगा, पस ईसा(अ) तशरीफ़ लायेगें उनका हाकिम ईसा से कहेगा आईये हमें नमाज़ पढ़ाईये वह कहेंगें तुम में बअज़ बअज़ पर इस उम्मत की अता करदा बुज़ुर्गी के सबब हाकिम है।[26]
असआफ़ूर राग़ेबीन में सबान(अलहनफ़ी) बयान करता है कि बअज़ रिवायत में वारिद हुआ है कि इमाम के ज़हूर के वक़्त बुलंदी से एक फ़रिश्ता इस तरह आवाज़ देगा यह महदी ख़ुदा की ख़लीफ़ा है, पस तुम लोग इसकी पैरवी करो। 
लोगों के दिलों में आपकी मुहब्बत भर जायेगी। मशरिक़ व मग़रिब की हुकुमत आपके हाथों में होगी। रुक्न और मक़ामे इब्राहीम के दरमियान आपसे बैअक करने वालों की तादाद अहले बद्र(313) के बराबर होगी। फिर आपकी ख़िदमत में शाम के अबदाल हाज़िर होगें। ख़ुदावंदे आलम आपकी हिमायत में ख़ुरासान से लश्कर रवाना फ़रमाएगा जिनके परचम स्याह होगें, फिर आप शाम की जानिब मुतवज्जेह होगें और दूसरी रिवायत में है कि आप कूफ़े की जानिब मुतवज्जेह होगें। ख़ुदावंदे आलम आपकी नुसरत तीन हज़ार फ़रिश्तों से फ़रमाएगा। और असहाबे कहफ़ आपके मददगार होगें।
सुयूती का बयान है किअसहाबे कहफ़ के इस मुद्दत तक ताख़ीर करने की वजह यही है कि वह इस उम्मत में दाख़िल हों और ख़लीफ़ा ए हक़ से मुलाक़ात करें। और इमाम के लश्कर के आगे क़बीला ए तमीम का एक शख़्स होगा, जिसकी दाढ़ी ख़फ़ीफ़ होगी और नाम शुऐब इब्ने सालेह होगा जिबरईल आपके लश्कर के सामने और मीकाईल पुश्त पर होगें। सुफ़यानी अपने लश्कर के साथ ख़ुरूज करेगा। और मक़ामे बैदा में पहुच कर बर्बाद हो जायेगा। जिनमें से मुख़्बिर के सिवा कोई और न बचेगा। कामयाबी महदी(अ) की होगी और सुफ़यानी को क़त्ल कर दिया जायेगा।
असआफ़ुर राग़ेबीन मेंमहदी(अ) के बअज़ आसार के बारे में इस तरह बयान किया गया है:
·        आपका ज़ुहूर ताक़ सालों में होगा।
·        आपकी हुकुमत मग़रिब व मशरिक़ पर मुहीत होगी।
·        आपके लिये ख़ज़ाने ज़ाहिर होगें।
·        ज़मीन में किसी क़िस्म की तबाहकारी न होगी।
मुन्तख़बे कंज़ुल उम्माल में अली(अ) से रिवायत की गयी है, आपने फ़रमाया: तालेक़ान के लिये मुबारकबाद है। इसलिये कि तालेक़ान में ख़ुदावंदे आलम के खज़ाने हैं जिनका तअल्लुक़ न सोने से है न चाँदी से, बल्कि उसमें ऐसे लोग मौजूद हैं जिन्हे ख़ुदावंदे आलम की कामिल मारेफ़त हासिल है। और वह लोग इमाम महदी(अ) के अंसार होगें।

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