मोमिन की पहचान

अक़वाले मासूमीन (अ0स0) मोमिन की सिफ़त :हदीस — पैग़म्बरे अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि) ने अमीरल मोमेनीन अली (अलाहिस्सलाम ) से फ़रमाया ...

मेहमान का एहतिराम और इस्लाम

आज मेहमान नवाजी का दस्तूर ख़त्म सा होता जा रहा है और इसका अंदाज़ भी बदलता जा रहा है | मेहमान किसी के घर जब आता था तो वो या तो मुसाफिर ...

युवाओं को सही उम्र में जीवन साथी कैसे मिले?

युवा अवस्था में आते ही एक नयी दुनिया से आमना सामना होने लगता है और ऐसे उत्सुकता वश और अज्ञानता वश युवा गलत राहों पे चल पड़ते हैं | सवाल...

मुसलमान आज भी इन साजिशों का शिकार नहीं है|

इस्लाम के सिलसिले में  इन दो लव्जों  फतवा और जिहाद का सबसे अधिक  ग़लत इस्तेमाल हुआ है | इसके ज्यादा ज़िम्मेदार हम मुस्लिम खुद ही हैं| हमन...

इस्लाम में इंसान की जान की कीमत

इस्लाम में इंसान की जान की कीमत का अंदाज़ा आप मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना क़ल्बे सादिक की इस विडियो में कही बातों से लगा सकते हैं |  डॉ कल्...

धार्मिक प्रवचनों को केवल कहानियों की तरह न सुने|

इंसान को जीवन में यदि कुछ पाना है तो उसके लिए मेहनत अवश्य करनी होती है लेकिन इन्सान की इच्छा हमेशा यही रही है की उसे कम या बिना मेहनत ...

इस्लाम की हकीकत

इस्लाम एक ऐसा धर्म है जिसके बारे में समाज में तरह तरह की बातें फैली हुई हैं जिनमे से अधिकतर या तो इसे बदनाम करने के लिए फैलाई गयी हैं य...

माँ बाप का दर्जा

इस्लाम में वालिदैन का मक़ाम ,लेखक .. मौलानाः सैय्यद मज़हर अली नक़वी अमरोहवी क़ुरआन माँ बाप के बारे में कहता हैः- तुम्हारे रब ने फ़...

सूरत या सीरत किस्मे आपका विशवास है |

कल मैंने एक लेख लिखा था " मैं मुसलमान हो गया |  " बहुत से लोगों ने सवाल भी पूछे| सभी के सवाल अपनी जगह जाएज़ हैं, इसीलिये यहाँ ...

मैं मुसलमान हो गया |

अक्सर यह इलज़ाम इस्लाम को मानने वालों पे लगाया जाता रहा है की इस्लाम तलवार की ज़ोर पे फैला | जबकि इस्लाम का उसूल है किसी पे जब्र नहीं | ज...

परदे अपने दिलों दिमाग से हटा डालो |

इंसान अशरफुल मख्लुकात है लेकिन यह इंसान अपने में इतना मशगूल हो जाया करता है की वो अपनी सलाहियतों को भी नहीं पहचान पाता | इंसान को चाहिए क...

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नजफ़ ऐ हिन्द जोगीपुरा का मुआज्ज़ा , जियारत और क्या मिलता है वहाँ जानिए |

हर सच्चे मुसलमान की ख्वाहिश हुआ करती है की उसे अल्लाह के नेक बन्दों की जियारत करने का मौक़ा  मिले और इसी को अल्लाह से  मुहब्बत कहा जाता है ...

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