महिलाओं के लिए श्रृंगार प्रदर्शन पर पुरुषो के बीच उचित नहीं है सूरए नूर, आयतें 43-60
सूरए नूर, आयतें 43-47 क्या तुमने देखा नहीं कि ईश्वर (ही पहले हवाओं के सहारे) बादलों को चलाता है? फिर उनको आपस में मिला देता है...
सूरए नूर, आयतें 43-47 क्या तुमने देखा नहीं कि ईश्वर (ही पहले हवाओं के सहारे) बादलों को चलाता है? फिर उनको आपस में मिला देता है...
सूरए नूर, आयतें 35-38, ईश्वर, आकाशों और धरती का प्रकाश है। उसके प्रकाश की उपमा ऐसी है जैसे एक ताक़ है, जिसमें एक चिराग़ है, वह...
१. हमेशा सही बात करो। ( 7- सूरह. 33) २. जब तुम पर कोई मुसीबत पड़े तो यक़ीन जानो के उसका बायस (कारण) तुम ख़ुद हो। ( 79- ...
चन्द गिरोहों पर क़ुरआने मजीद में ख़ुदा और औलिया-अल्लाह की तरफ़ से वाज़ेह तौर (ख़ुले रूप) से लानत की गई है। सवाल यह पैदा होता ह...
दुनिया व आखेरत की नेकी परवरदिगार हमें दुनिया में भी नेकी अता फ़रमा और आख़ेरत में भी, और हमें जहन्नम के अज़ाब से महफ़ूज़ फ़रमा। ...
सूरए आले इमरान की आयत संख्या ५४ तथा ५५ इस प्रकार है। (ईसा मसीह के शत्रुओं ने उनकी हत्या की) योजना बनाई और ईश्वर ने भी (उन्हें बचाने...
सूरए नूर, आयतें 24-29, जिस दिन कि उनकी ज़बानें, उनके हाथ और उनके पाँव उनके विरुद्ध उन (कर्मों) की गवाही देंगे, जो वे करते...
और तुम में जो (युवा व युवतियां) अविवाहित हों और तुम्हारे दासों व दासियों में जो भले व योग्य हों, उनका विवाह कर दो (और दरिद्रता स...
हर सच्चे मुसलमान की ख्वाहिश हुआ करती है की उसे अल्लाह के नेक बन्दों की जियारत करने का मौक़ा मिले और इसी को अल्लाह से मुहब्बत कहा जाता है ...