ईद में मुस्लमान आपस में गले क्यों मिलते हैं खुश क्यों होते हैं | : हज़रत अली की ज़बानी

सभी लोगों को ईद की मुबारकबाद  मैखान-ए-इंसानियत की सरखुशी, ईद इंसानी मोहब्बत का छलकता जाम है। आदमी को आदमी से प्यार करना चाहिए, ईद क...

सभी लोगों को ईद की मुबारकबाद 

मैखान-ए-इंसानियत की सरखुशी, ईद इंसानी मोहब्बत का छलकता जाम है।
आदमी को आदमी से प्यार करना चाहिए, ईद क्या है एकता का एक हसीं पैगाम है।
                                                                     .........मशहूर शायर कामिल जौनपुरी


माहे रमजान में पूरे महीने हर मुसलमान रोज़े रखता है और इन रोजो में गुनाहों से खुद को दूर रखता है | पूरे महीने अल्लाह की इबादत के बाद जब ईद का चाँद नज़र आता है तो सारे मुसलमानों के चेहरे पे एक ख़ुशी नज़र आने लगती है | क्यूँ की यह ईद का चाँद बता रहा होता है की कल ईद की जिन्होंने इस माह ऐ रमज़ान में खुद को गुनाहों से दूर रखा  अल्लाह  नमाज़ के बाद उनकी नेकियों को कुबूल करेगा और गुनाहों को धोने का एलान फरिश्तों से करवाएगा |

चाँद देखते ही अल्लाह का हुक्म है ठहरो ख़ुशी की तैयारी करने से पहले गरीबों के बारे में सोंचो और सवा तीन सेर अन्न  के बराबर रक़म परिवार के हर इंसान के नाम से निकालो और फ़ौरन गरीबों को दे दो जिस से उनके घरों में भी ईद वैसे ही मनाई जाए जैसे आपके घरों में मनाई जाएगी | यह रक़म निकाले बिना ईद की नमाज़ अल्लाह कुबूल नहीं करता | इस रक़म को फितरा कहते हैं जिसपे सबसे अहले आपके अपने गरीब रिश्तेदार , फिर पडोसी, फिर समाज का गरीब और फिर दूर के रोज़ेदार का हक़ होता है|

बच्चों की ईद इसलिए सबसे निराली होती है क्योंकि उन्हें नए-नए कपड़े पहनने और बड़ों से ईदी लेने की जल्दी होती है. बच्चे, चांद देख कर बड़ों को सलाम करते ही यह पूछने में लग जाते हैं कि रात कब कटेगी और मेहमान कब आना शुरू करेंगे. महिलाओं की ईद उनकी ज़िम्मेदारियां बढ़ा देती है. एक ओर सिवइयां और रंग-बिरंगे खाने तैयार करना तो दूसरी ओर उत्साह भरे बच्चों को नियंत्रित करना. इस प्रकार ईद विभिन्न विषयों और विभिन्न रंगों के साथ आती और लोगों को नए जीवन के लिए प्रेरित करती है| ईद यही पैगाम लेकर आता है कि हम इसे मिलजुल कर मनाएं और अपने दिलों से किसी भी इंसान के लिए हसद और नफरतों को निकाल फेंके और सच्चे दिल से हर अमीर गरीब ,हिन्दू मुसलमान , ईसाई से गले मिलें और समाज को खुशियों से भर दें |

शब्दकोष में ईद का अर्थ है लौटना और फ़ित्र का अर्थ है प्रवृत्ति |इस प्रकार ईदे फ़ित्र के विभिन्न अर्थों में से एक अर्थ, मानव प्रवृत्ति की ओर लौटना है|अल्लाह ने मानव प्रवत्ति में ज़ुल्म ,फरेब गुनाह नहीं रखा है यह तो दुनिया की लालचें और लाज़तें है जो इंसान को मानव प्रवत्ति से हटा देती हैं |  बहुत से जगहों पे इसे अल्लाह की और लौटना भी कहा गया है जिसके मायने है इंसानियत की तरफ अपने दिलों से नफरत, जलन हसद ,द्वेष इत्यादि बुराईयों को निकालना |
हकीकत यह है कि मनुष्य अपनी अज्ञानता और लापरवाही के कारण धीरे-धीरे हकीकत  और सच्चाई से दूर होता जाता है| वह खुद को भूलने लगता है और अपनी फितरत  को खो देता है. मनुष्य की यह गलती और असावधानी अल्लाह  से उसके रिश्ते  को ख़त्म कर देती है| रमज़ान जैसे मौके पे  मनुष्य को जागृत करते और उसके मन तथा आत्मा पर जमी गुनाहों की धूल को झाड़ देते हैं|इस स्थिति में मनुष्य अपनी प्रवृत्ति की ओर लौट सकता है और अपने मन को इस प्रकार पाख औ पाकीज़ा  बना सकता है कि वह फिर से सच  के इंसानियत के  प्रकाश को प्रतिबिंबित करने लगे|

हज़रत अली अलैहिस्सलाम कहते हैं कि हे लोगो, यह दिन आपके लिए ऐसा दिन है कि जब भलाई करने वाले अल्लाह से अपना इनाम  प्राप्त करते और घाटा उठाने वाले निराश होते हैं। इस प्रकार यह दिन रोज़ ऐ महशर  के दिन के समान होता है। इसलिए  अपने घरों से ईदगाह की ओर जाते समय ख्याल  कीजिए की आप  मानों क़ब्रों से निकल कर अल्लाह  की तरफ  जा रहे हैं। नमाज़ में स्थान पर खड़े होकर अल्लाह  के सामने  खड़े होने का ख्याल कीजिए। घर लौटते समय, जन्नत  की तरफ लौटने का ख्याल  कीजिए। इसीलिये यह बेहतर है कि नमाज़ ए ईद खुले मैदान मैं अदा कि जाए और उसे महशर का मैदान समझा जाय और सर पे सफ़ेद रुमाल हो जिसे कफ़न समझा जाय नंगे पैर ईद कि नमाज़ मैं जाए जैसे रोज़ ऐ महशर क़ब्र से उठे गए हैं और अल्लाह के सामने अपना अमाल ले के जा रहे हैं |  नमाज़ से पहले गुसल करे और सजदा नमाज़ के दौरान मिट्टी पे करे| ईद की नमाज़ में जाने से पहले घर से नाश्ता कर के निकले | 

ईद की नमाज़ होने के बाद एक फ़रिश्ता पुकार-पुकार कर कहता हैः अच्छी खबर है तुम्हारे लिए ऐ अल्लाह के बन्दों कि तुम्हारे गुनाहों  को माफ़  कर दिया गया है इसलिए  बस अपने भविष्य के बारे में विचार करो कि बाक़ी दिन कैसे तक़वे के साथ  बिताओगे यह सोंचो ? इस जन्नत की अच्छी खबर को महसूस करने के बाद रोज़ेदार खुश हो जाता है और एक दुसरे को गले मिल के मुबारकबाद देता है | घरों की तरफ लौट के खुशियाँ मनाता है और अल्लाह से वादा करता है की अब पाप से बचूंगा और समाज में एकता और शांति के लिए ही काम करूँगा | 


आप सभी पाठको को ईद मुबारक |--- एस एम् मासूम 
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