मुख़्तार अब्बास नक़वी ने ईरान की ओर से अजमेर दरगाह के लिए भेजे गए शिलालेख का अनावरण किया

भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने अजमेर में ख़ाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के लिए ईरान की ओर से दिए गए तोहफ़े का अनावरण क...





भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने अजमेर में ख़ाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के लिए ईरान की ओर से दिए गए तोहफ़े का अनावरण किया।

मुख़्तार अब्बास नक़वी ने रविवार को ख़ाजा चिश्ती के 805वें उर्स के अवसर पर ईरान की ओर से अजमेर दरगाह के लिए भेजे गए शिलालेख का अनावरण किया। टाइलों से बने डेढ़ मीटर लम्बे और एक मीटर चौड़े इस बोर्ड पर पैग़म्बरे इस्लाम के नाती इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शान में ख़ाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की बेहद मशहूर रुबाई सुंदर अक्षरों में लिखी हुई है। ईरान के अलग़दीर फ़ाउंडेनशन की ओर से भेजे गए टाइलों के इस तुग़रे का अनावरण करते हुए भारत के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़वी ने कहा कि यह तोहफ़ा, भारत और ईरान के मज़बूत रिश्तों को अधिक ऊंचाई तक पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल एक तुग़रा नहीं है बल्कि दोनों देशों को जोड़ने और शांति, इंसानियत और भाईचारे का संदेश है। उन्होंने भारत में पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों के श्रद्धालुओं की ओर संकेत करते हुए कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक क़दमों से मुसलमानों की एकता मज़बूत होगी। नक़वी ने इसके लिए ईरान सरकार का आभार प्रकट किया।
इस अवसर पर भारत में ईरान के राजदूत ग़ुलाम रज़ा अंसारी ने भारत सरकार का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के रिश्ते अधिक मज़बूत होंगे। उन्होंने कहा कि यह तुग़रा, भारत और ईरान के संबंधों में विस्तार का प्रतीक सिद्ध हो सकता है। अंसारी ने कहा कि भविष्य में ईरान की ओर से इस प्रकार के कई अन्य तुग़रे भारत भेजे जाएंगे। ईरान के राजदूत ने आशा जताई कि भारत और ईरान के संबंध पहले से अधिक विस्तृत होंगे। अजमेर दरगाह के लिए ईरान के इस तोहफ़े के अनावरण के अवसर पर ईरान और भारत की अनेक सरकारी व सांस्कृतिक हस्तियों ने भाग लिया। इमाम हुसैन की प्रशंसा में ख़ाजा मुईनुद्दीन चिश्ती की इस रुबाई का अनुवाद हैः
हुसैन सम्राट हैं, हुसैन बादशाह हैं
हुसैन धर्म हैं, हुसैन धर्म की शरण हैं
उन्होंने सिर दे दिया लेकिन यज़ीद से हाथ नहीं मिलाया
ईश्वर की सौगंध कि हुसैन, ला इलाह (कलमे) का आधार हैं।


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