नमाज़े शब पढ़ने का तरीक़ा

नमाज़े शब  पढ़ने का तरीक़ा नमाज़े शब जिसको नमाज़े तहज्जुद भी कहा जाता है एक मुस्तहब्बी नमाज़ है लेकिन इस नमाज़ के लिए इस्लाम मे...



नमाज़े शब  पढ़ने का तरीक़ा



नमाज़े शब जिसको नमाज़े तहज्जुद भी कहा जाता है एक मुस्तहब्बी नमाज़ है लेकिन इस नमाज़ के लिए इस्लाम में बहुत ताक़ीद की गई हैं, यह नमाज़ पैग़म्बरे इस्लाम (स) और मासूमीन पर वाजिब होती है लेकिन आम मुसलमानों के लिए यह मुस्तहेब है लेकिन इसके पढ़ने की बहुत अहमियत है इस नमाज़ में ग्यारह रकअतें हैं आठ रकअत नमाज़े शब की नीयत से, दो रकअत नमाज़े शफ़्अ की नीयत से और एक रकअत नमाज़े वित्र की नीयत से पढ़ी जाती है, नमाज़े शफ़ा में क़ुनूत नही होता और नमाज़े वित्र एक रकअत है जिस में कुनूत के साथ चालीस मोमिनीन का नाम लिया जाता है।

नमाज़े शब की अहमियत इतनी अधिक है कि उसके बारे में बहुत सवाब और बरकतों को बयान किया गया है यहां पर हम नमाज़े शब के कुछ फ़ायदों को लिख रहे हैं, और हमे आशा है कि इन फ़ायदों को देखते हुए हम लोग अधिक से अधिक नमाज़े शब पढ़ने पर अपना ध्यान केन्द्रित कर पाएंगे, ईश्वर से प्रार्थना है कि हमको नमाज़े शब पढ़ने की तौफ़ीक़ दे।
नमाज़े शब
नमाज़े शब

नमाज़े शब के फ़ायदे

1. नमाज़े शब पढ़ने से सेहत अच्छी रहती है।

2. नमाज़े शब ईश्वर को प्रसन्न करती है।

3. नमाज़े शब नबियों की परम्परा का अनुसरण है।

4. नमाज़े शब ईश्वर की कृपा को पास लाती है। (1)

इमाम अली (अ) नमाज़े शब की अज़मत को बयान करते हुए फ़रमाते हैं:

मैंने जब से रसूले ख़ुदा (स) से सुना है कि नमाज़े शब नूर है तो उस को कभी छोड़ा नहीं यहां तक कि जंगे सिफ़्फ़ीन में लैलतुल हरीर में भी उसे नहीं छोड़ा। (2)

नमाज़े शब पढ़ने का तरीक़ा
नमाज़े शब ग्यारह रकअत हैः दो दो रकअत कर सुबह की तरह आठ रकअत, नमाज़े शब की नियत से पढ़ी जाए। और एक दो रकअती नमाज़ नमाज़े शफ़्अ की नियत से पढ़ी जाए। और एक रकअत नमाज़े वित्र पढ़ी जाए।

नमाज़े शब

नियतः नमाज़े शब की रकअत की नियत होगीः नमाज़े शब पढ़ता हूँ क़ुरबतन एलललाह।

पहली रकअत में: एक बार अलहम्द + एक बार क़ुल हुवल्लाह का सूरा।

दूसरी रकअत में: अलहम्द के बाद एक बार क़ुल हुवल्लाह, फिर क़ुनूत उसके बाद सुबह की तरह पूरी नमाज़ पढ़ी जाए।

नमाज़े शफ़्अ

नियतः नमाज़े शफ़्अ पढ़ता हूँ क़ुरबतन एलललाह।

पहली रकअत में: एक बाल अलहम्द का सूरा और एक बार कुल हुवल्लाह का सूरा और एक बार क़ुल आऊज़ों बेरब्बिन नास ( قل اعوذ برب الناس ) का सूरा पढ़े

दूसरी रकअत में: एक बार अलहम्द, एक बार क़ुल हुवल्लाह और एक बार क़ुल अऊजो़ बेरब्बिल फ़लक़ (قل اعوذ برب الفلق) पढ़े उसके बाद क़ुनूत और फिर सुबह की तरह नमाज़ पढ़के समाप्त कर दे।

नमाज़े वित्र

नियतः नमाज़े वित्र पढ़ता हूँ क़ुरबतन एलललाह।

तरीक़ाः एक बार अलहम्द का सूरा + तीन बार क़ुल हुवल्लाह का सूरा + एक बार क़ुल अऊज़ो बेरब्बिल फ़लक़ का सूरा + एक बार क़ुल अऊज़ो बेरब्बिन नास का सूरा

क़ुनूतः चालीस बार कहेः अल्लाहुम्मा इग़फ़िर लिल मोमिनीना वल मोमिनाते वल मुस्लेमीना वल मुस्लेमात (اَللّهُمَّ اِغْفِر لِلْمومِنينَ وَ اَلْمومِناتْ وَ اَلْمُسلِمينَ وَ اَلْمُسلِماتْ)

उसके बाद सत्तार बार कहेः हाज़ा मक़ामुल आएज़े बिका मिनन्नार (هذا مَقامُ الْعائِذِ بِكَ مِنَ اَلْنار)

उसके बाद तीन सौ बार कहेः अलअफ़्व (اَلْعَفو)

उसके बाद एक बार कहेः रब्बे इग़फ़िररी वरहमनी व तुब अलय्या इन्नका अनतत्तव्वाबुर रहीम
(رَبّ اغْفِرْلى وَ ارْحَمْنى وَ تُبْ عَلىََّ اِنَّكَ اَنْتَ التّوابُ اَلْغَفُورُ الرّحيم )

फ़िर रुकूअ, सजदा, तशह्हुद और सलाम पढ़के नमाज़ समाप्त कर दे और नमाज़ के बाद तस्बीहे फ़ातेमा ज़हरा (स) पढ़े।

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1. क़ुतबुद्दीन रावन्दी, अद दअवात पेज 76
2. बिहारुल अनवार जिल्द 4

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