इस्लामी इंक़िलाब के अलम्बरदार इमाम खुमैनी (रआ) की तहरीक में साथ रहने मौलाना सैय्यद अली क़ासिम रिज़वी का निधन|




इस्लामी इंक़िलाब के अलम्बरदार इमाम खुमैनी (रआ) की तहरीक में साथ रहने वाले और उनके उर्दू अनुवादक मौलाना सैय्यद अली क़ासिम रिज़वी का आज नजफ़ के अल हाकिम अस्पताल में निधन हो गया।

मौलाना अली क़ासिम अपनी दो बेटियों और बहन के साथ ज़ियारत के लिए इराक गए थे। लखनऊ के तहसीन गंज स्थित शाही जमा मस्जिद के इमाम मौलाना अली क़ासिम कल नजफ़ के होटल में लिफ्ट से चोट लग जाने के कारण ज़ख़्मी हो गए थे उनको प्राथमिक चिकित्सा के बाद होटल भेज दिया गया था।

सूत्रों के अनुसार आज उनको तेज़ दर्द होने की वजह से नजफ़ के अल हाकिम अस्पताल ले जाया गया जहाँ उनका निधन हो गया। लगभग एक हफ्ते पूर्व उनकी बहन का निधन कर्बला में हुआ था।

मौलाना अली क़ासिम के पसमन्दगां में तीन बेटीयां और दो बेटे हैं। उनके निधन की खबर सुनते ही शिया क़ौम में शोक की लहर दौड़ गयी। मौलाना मंज़र सादिक़, मौलाना लियाक़त रज़ा, मौलाना मोहम्मद रज़ा समेत काफी तादाद में उलमा, दानिश्वर उनके घर पहुंच गए।  उनके बेटे को ताज़ियत पेश की।

मौलाना अली क़ासिम रिज़वी मरहूम के इसाल-ए-सवाब के लिए जामा मस्जिद में मजलिस -ए अज़ा और तजियति जलसे का आयोजन किया गया।  मौलाना को नजफ़ स्थित वादी उस सलाम क़ब्रिस्तान में सुपुर्द ए ख़ाक किया गया। मरहूम मौलाना अली क़ासिम की खुशनसीबी यह रही की बहन को कर्बला में दफ़न करने के बाद खुद नजफ़ ए अशरफ में स्थित वादी उस सलाम कबरिस्तान में जगह पा कर जवरहे-ए-मासूमीन में जगह पाने की तस्दीक कर दी।

वाज़ेह रहे मौलाना अली क़ासिम रिज़वी ने मज़हबी तालीम लखनऊ के सुल्तानुल मदारिस से सदरुल्लाह फ़ाज़िल किया था इसके बाद वह ईरान उच्च शिक्षा के लिए चले गए जहाँ पर उन्होंने इस्लामी क्रांति में इमाम खुमैनी का साथ देते हुए हिस्सा लिया और इमाम खुमैनी के उर्दू अनुवादक के तौर पर काम करते हुए अपना किरदार अदा किया। उसके बाद वह 1988 में लखनऊ आ गए और ज़हरा कॉलोनी मुफ्तीगंज में रहने लगे।  

अपने सादे और इन्क़िलाबी विचारों के लिए मौलाना अली क़ासिम ने कम वक़्त में ज़्यादा मक़बूलियत हासिल कर ली।




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