इस्लाम में मानवता, सौहार्द, भाई-चारे की शिक्षा – डॉ कल्बे सादिक

कुछ दिनों पहले मेरा जाना बाराबंकी हुआ तो वहाँ जनाब रिजवान मुस्तफा के अनुरोध पे एक मजलिस  ए हुसैन (अ.स) को सुनने का मौक़ा मिला. अरविन्द...


कुछ दिनों पहले मेरा जाना बाराबंकी हुआ तो वहाँ जनाब रिजवान मुस्तफा के अनुरोध पे एक मजलिस  हुसैन (अ.स) को सुनने का मौक़ा मिला. अरविन्द विद्रोही जी भी वहाँ मजूद थे जिनको  मैंने  वहाँ बड़े ध्यान से
डॉ कल्बे सादिक को सुनते देखा था. आज उनका यह लेख देख के अच्छा लगा. पेश है अमन और शांति का पैग़ाम देता एक  बेहतरीन और इमानदारी से लिखा गया अरविन्द विद्रोही जी का  लेख – “मानवता-सौहार्द-नैतिकता-भाई चारे की शिक्षा देते संत – डॉ कल्बे सादिक”  …एस एम मासूम
 
बाराबंकी के कर्बला में मजलिस ए गम में शामिल होने का निमंत्रण वरिष्ट पत्रकार रिजवान मुस्तफा के द्वारा  मुझे प्राप्त  हुआ तो अपने सामाजिक सरोकार व पत्रकारिता के धर्म का पालन करने हेतु मैं वहा पहुच गया | तक़रीबन दोपहर 12 बजे इस्लामिक – शिया धर्म गुरु  डॉ कल्बे सादिक समारोह स्थल पर आये, मंच पर आते ही उन्होंने उपस्थित जनों से मुखातिब होते हुए कार्यक्रम में देरी से आने के लिए माफ़ी मांगी | आज के दौर में जहा पर लोग अपनी बड़ी गलतियो पर सामाजिक-सार्वजनिक रूप से माफ़ी नहीं मांगते है, उस दौर में एक प्रख्यात हस्ती, एक धर्म गुरु द्वारा सामान्य जन से कार्यक्रम  के प्रारंभ में ना आ सकने की माफ़ी मांगना, यकीन मानिये  मैं तो हतप्रभ रह गया | और तो और देर से आने की पूर्व सूचना  भी धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने आयोजक रिजवान मुस्तफा को दे दी थी | उसके बाद भी माफ़ी | आह ! विनम्रता की प्रतिमूर्ति – तुझे मेरा प्रणाम, उसी पल मैंने मन ही मन उन्हें अपना अभिवादन प्रेषित किया | मुझे आभास हुआ की आज यह समारोह कुछ विशिष्ट सन्देश  प्राप्ति का स्थल बनेगा | अपने संबोधन में डॉ कल्बे सादिक ने धर्म क्या है, पर सरल व मृदु वचनों में कहा कि  धर्म  वो है जो आपको गलत रास्ते पर जाने से बचाए |
आज धर्म को बचाने की बात होती है, कोई इन्सान धर्म कैसे बचा सकता है? धर्म तो आपको बचाने, सही रास्ता दिखाने के लिए है | धर्म के नाम पर मतभेद ख़त्म करने की अपील करते हुए धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने कहा  कि आज यहाँ कर्बला में  शिया – सुन्नी, हिन्दू सभी धर्म के मानने वाले मौजूद है | मैं  हज़रत साहेब को मानने वालो से पूछना चाहता हूँ कि हज़रत साहेब  से जंग क्या हिन्दू ने लड़ी थी? बगैर ज्ञान के मनुष्य जानवर से भी बदतर  होता है | खुदा, परमेश्वर जो भी कहिये उसने सबसे बुद्धिमान मनुष्य को बनाया है और यह मनुष्य अपने कर्मो से अपने को सबसे नीचे गिरा लेता है | ज्ञान व विज्ञान इन्सान व  इस्लाम के फायदे के लिए है | ज्ञान हासिल करना नितांत जरुरी है | कई घटनाओ का हवाला देते हुए डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि जुल्म के खिलाफ  लड़ने वाला ही सच्चा मुसलमान होता है, जुल्म  करने वाला मुसलमान हो ही नहीं सकता | आतंकवाद के सवाल पर धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि मैं यह जिम्मेदारी लेता हूँ कि हज़रत मोहम्मद साहेब को मानने वाला कभी भी दहशत गर्त  हो ही नहीं सकता, जो दहशत गर्त  हैं और जो  बेगुनाहों का  खून बहाते है उनसे पूछा जाये यकीनन वो जुल्मी यजीद को मानने वाले ही होंगे | मोहम्मद साहेब को मानने वाला जुल्मी हो ही नहीं सकता | बहकावे और उकसाने वाली कार्यवाहियो से बचे रहने तथा अमन चैन की  पैरोकारी करने की अपील करते हुए डॉ कल्बे सादिक ने एक वाकया सुनाया | उन्होंने बताया की यह बात हज़रत साहेब के दौर की है |
एक अरबी उस मस्जिद में पाहुजा जिसे खुदा की इबादत के लिए रसूल ने अपने हाथो से तामीर की थी | उस अरबी ने मस्जिद में पेशाब करना शुरु कर दिया , वहा रसूल के साथ  मौजूद सेवक  ने उस अरबी को रोकना चाहा, रसूल ने सेवक से कहा – जरा ठहरो, उसे कर लेने दो पेशाब | वहा गन्दगी फैला कर वह  अरबी वापस चल दिया, अब रसूल ने कहा मस्जिद में जो गन्दगी इसने पेशाब करके फैलाई है, उसको पानी से धो कर साफ़ कर दो | खुद रसूल ने कई बाल्टी पानी डाल डाल कर वहा सफाई करवाई | अरबी वहा आया था खलल पैदा करने के मकसद से व मार पीट के इरादे से | रसूल के इस प्रकार के व्यव्हार से वह  अरबी भी रसूल का मुरीद हो गया | यह वाकया सुना कर डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि  यह है हज़रत मोहम्मद साहेब का चरित्र | इस क्षमा और विनम्रता की  राह पर चल कर रसूल ने इस्लाम को विस्तार दिया था और आज आप मुसलमान क्या कर रहे हो ? यह सोचिये… हिन्दुओ के त्यौहार होली में रंग अगर मस्जिद की दीवारों पर पड़ जाये तो आप उत्तेजित हो जाते हो | अरे.. होली का रंग तो पाक  होता है, दीवारों पर  चूना लगा कर दीवारों को फिर से चमका सकते हो लेकिन आप लोग तो इंसानों को चुना लगा सकते हो लेकिन मस्जिद की रंग लगी दीवारों पर चूना नहीं लगा सकते हो | इस्लाम  जुल्म के खिलाफ लड़ने का, आपसी भाईचारे का, विनम्रता का सन्देश देता है |
धर्मगुरु डॉ  कल्बे सादिक ने मुसलमानों से कहा कि  आप कि पहचान क्या है ? आज आप समाज में लम्बे कुरते, ऊँचे पायजामे, लम्बी दाढ़ी, टोपी से पहचाने जा रहे है | जिस जगह मीनारे, गुम्बद , मस्जिद होती है – लोग कहते है यहाँ मुसलमान रहते है | आज आपका बाहरी व्यक्तित्व  आपकी पहचान बन चुका है | इस्लाम व मुसलमान का वास्तविक रूप सामने लाने की जरुरत है | डॉ कल्बे सादिक ने बताया कि सही मायने में मुसलमान बस्ती वो है जहा पर कोई मांगने वाला ना हो सब देने वाले हो | मस्जिद खुदा का घर होता है | वह पाक जमीन पर बननी चाहिए | किसी दुसरे की जमीन पर  जुल्म जबरदस्ती के जोर से मस्जिद बनाने से वो खुदा का घर नहीं हो जाता | जुल्मी शासक  लोग धर्म का इस्तेमाल अपने गुनाहों और जुल्मो को छिपाने के लिए धर्म का बेजा इस्तेमाल करते रहे है | ऐसे जुल्मी कभी भी खुदा के बन्दे नहीं हो सकते | जनाब डॉ कल्बे सादिक ने इस पर भी एक वाकया सुनाया | उन्होंने कहा कि अगर एक जरुरत मंद का मकान बनवा दिया जाये तो खुदा उसको अपना आशियाना मानता है | जरुरतमंदो की मदद करना खुदा के बताये राह पर चलना है | नेक कामों से इस्लाम का विस्तार हुआ , आज नेकी की राह पर सभी को चलने की जरुरत है |
समाज में और विशेष कर मुसलमानों में शिक्षा की कमी पर धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने बार बार चिंता व्यक्त की | उन्होंने कहा कि विश्व हिन्दू परिषद्  के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया ने कहा है कि हर मस्जिद के बगल में मंदिर बनाया जायेगा, मैं उनसे अनुरोध करता हूँ कि वे हर मस्जिद के बगल में विद्या मंदिर की स्थापना जरुर करवा दे | जिससे हिन्दुओ के साथ साथ मुसलमान बच्चे भी शिक्षा ग्रहण करे और ज्ञान कि रौशनी में भारत की  तरक्की में अपना योगदान करे |
अंत में अपनी वाणी को विराम देने के पहले इस्लामिक शिया धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि बैगैर ज्ञान के इन्सान व देश – समाज की तरक्की नामुमकिन है | इसलिए ज्ञान हासिल कीजिये | समापन के अवसर पर कर्बला की जंग के वाकये को याद करते  व दिलाते हुए धर्म गुरु ने सवाल किया कि यह जंग क्या हिन्दुओ से लड़ी गयी थी ? अरे ..वो यजीद और उसके लोग थे, और वो भी पांचो वक़्त के नमाज़ी ही थे.. जिन्होंने रसूल के नवासे को प्यासा ही मार डाला था | यह बात जन समुदाय को उद्वेलित कर गयी | लोगो की सिसकियाँ  रुदन में तब्दील हो चुकी थी, इसी समय डॉ कल्बे सादिक ने कहा कि खुदा ना करे कभी ऐसा हो, लेकिन अगर कही फसाद हो जाये और आप मुसलमान किसी हिन्दू बस्ती में अपने परिवार व बच्चो के साथ पीने का पानी मांगोगे तो यह मेरा यकीन है कि हिन्दू फसाद भूल कर आपको अपने घर में पनाह देंगे, पानी – खाना देंगे, लेकिन इतिहास गवाह है कि उन यजीद के मानने वालो ने प्यासा ही मार डाला था | कर्बला का वह दर्दनाक मंज़र सुनकर रुदन कर रहे जन समुदाय का ह्रदय जुल्म के खिलाफ लड़कर शहीद हुए कर्बला के वीरो को अपने श्रधा सुमन अर्पित करने लगा था | इन्सान मात्र से प्रेम, शिक्षा ग्रहण करने की सलाह, जरुरत मंदों की मदद, अन्याय – जुल्म से लड़ने की सीख़ देते  हुए इस्लामिक शिया धर्म गुरु डॉ कल्बे सादिक ने  अपनी वाणी को विराम दिया

लेखक अरविंद विद्रोही
एक सामाजिक कार्यकर्ता और आज़ाद पत्रकारिता .गोरखपुर में जन्म, वर्तमान में बाराबंकी, उत्तर प्रदेश में निवास है। छात्र जीवन में छात्र नेता रहे हैं। वर्तमान में सामाजिक कार्यकर्ता एवं लेखक हैं। डेलीन्यूज एक्टिविस्ट समेत इंटरनेट पर लेखन कार्य किया है तथा भूमि अधिग्रहण के खिलाफ मोर्चा लगाया है। अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 1, अतीत की स्मृति से वर्तमान का भविष्य 2 तथा आह शहीदों के नाम से तीन पुस्तकें प्रकाशित। ये तीनों पुस्तकें बाराबंकी के सभी विद्यालयों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को मुफ्त वितरित की गई हैं।
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