इस्लाम के कानून परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तनशील हैं |

लोग कहते हैं इस्लाम १४०० साल पुराना धर्म है इसके कानून में आज तरक्की के युग में बदलाव होना चाहिए जबकि सच्चाई यह है  की इस्लाम के कानून प...

लोग कहते हैं इस्लाम १४०० साल पुराना धर्म है इसके कानून में आज तरक्की के युग में बदलाव होना चाहिए जबकि सच्चाई यह है  की इस्लाम के कानून परिस्थितियों के अनुसार खुद बदलते रहते हैं |अक्सर होता यह है कि लोग इस्लाम धर्म को समझे बिना इसके कानून पे सख्ती से अमल करने वाले को कट्टरवादी या  संकीर्ण मानसिकता का प्रतीक मानते  हैं | जब कि यह सारी बातें केवल एक फरेब हैं| यह सच है की अल्लाह के हुक्म के आगे मुसलमान किसी की नहीं सुनता और यही मुसलमान की खूबी है | इस्लाम धर्म  के कानून इंसानों को फायदा पहुंचाते हैं नुकसान नहीं फिर आज के युग का हवाल दे के इसे बदलने की बातो का क्या मतलब है ? मैं यह मानता हूँ की यदि किसी भी धर्म के कोई कानून समाज में बेईज्ज़त का कारण बने या हंसी का कारण बने या समाज को किसी तरह का नुकसान पहुंचाए तो उस पे अड़ियल रवैया सही नहीं और इस्लाम के कानून भी यही पैगाम देते हैं | आज बात करेंगे ऐसे कुछ कानून की जिनका सहारा ले के लोग कुरान में परिवर्तन का मशविरा दिया करते हैं|

सवाल : क्या इस्लाम परिवार नियोजन के खिलाफ है ?
जवाब : नहीं इस्लाम परिवार नियोजन के खिलाफ नहीं बल्कि भ्रूण हत्या के खिलाफ है | हाँ इस्लाम इसकी इजाज़त तब देता है जब परिवार नियोजन ना करने से कोई नुकसान हो रहा हो |

सवाल २: क्या इस्लाम में तलाक देने का तरीका तीन बार तलाक कह के पत्नी से छुटकारा पा लेना है |
जवाब : नहीं केवल तीन बार तलाक कह देने से तलाक़ नहीं हो जाता बल्कि इसका एक लम्बा तरीका है जिसे आप मेरे इस लेख में पढ़ सकते हैं |

सवाल ३: क्या इस्लाम में मांसाहार आवश्यक है ?
जवाब ४) इस्लाम में मांसाहार मना नहीं है लेकिन इसकी अधिकता को ठीक नहीं समझा जाता और हर जानवर भी खाया नहीं जा सकता | कुछ ही जानवर ऐसे हैं जिनको खाने की इजाज़त दी गयी है| कौन जानवर मना है और कौन खाया जा सकता है इसके कारण भी बताये गए हैं |

सवाल 5) क्या इस्लाम में परदे का मतलब होता है काले लिबास में सर से लेकर पैर तक महिला को छुपा के रखना और घर से बहार ना जाने देना |
जवाब ) इस्लाम में चेहरे का पर्दा नहीं है और महिला तथा पुरुष दोनों का एक दुसरे से अपना शरीर छुपाने का हुक्म है जिसे पर्दा कहते हैं | यह काम ढीली शलवार कमीज़ पहन के भी महिलाएं कर सकती हैं और सारी में आँचल से सर छुपा के भी किया जा सकता है | काला नकाब या चेहरे का छिपाना इलाकाई  दस्तूर है जो पुरुष प्रधान कानून के चलते बनाया गया है | इस्लाम और कुरान में ऐसा कोई हुक्म नहीं है |

सवाल 6) क्या इस्लाम में बालविवाह की इजाज़त है ?
जवाब ) इस्लाम में उस समय तक विवाह नहीं हो सकता जब तक लड़का और लड़की दोनों बालिग़ ना हो जायें या ऐसा कह लें गर्भधारण के काबिल ना हो जाएँ |शादी लड़के और लड़की की मर्जी के खिलाफ नहीं की जा सकती या कहलें माता पिता की केवल मर्जी से शादी संभव नहीं है |

सवाल7) इस्लाम क्या मुसलमानों को दुसरे धर्म के लोगों से मिलने जुलने पे कोई पाबन्दी लगाता है ?
जवाब) नहीं ऐसी कोई पाबन्दी नहीं है बल्कि दुसरे धर्म के लोगों से मिलने जुलने पे और अच्छे व्यवहार को पुण्य मानता है |

सवाल 8) क्या इस्लाम में कुरान के कानून के खिलाफ जाने वाले मुसलमान पे किसी प्रकार की ज़बरदस्ती करने का हुक्म है ?
जवाब ) नहीं इस्लाम में ज़बरदस्ती मना है और सजा देने वाला सिर्फ अल्लाह है | हाँ उन जुर्म की सजा अवश्य है जो किसी दुसरे इंसान को नुकसान पहुंचा रहा हो | जैसे चोरी, बलात्कार इत्यादि लेकिन यह सजा भी इस्लाम के कानून का जानकार मुजतहिद या क़ाज़ी  ही दे सकता है ,आम इंसानों को ऐसा करने की मनाही है |


आज विश्व के सारे मुसलमान इन्ही कानून को मानते हैं  | मैंने यहाँ उनका ज़िक्र नहीं किया है जहां कुरान और मुसलमान के व्यवहार में विरोधाभास हो और कोई यह कहे की भाई कुरान में क्या लिखा है यह अहमियत नहीं रखता बल्कि मुसलमान क्या करता है यह अहम् है | मैं खुद इस बात से सहमत हूँ |

आज हम जिस युग में जी रहे हैं वहाँ शराब और शबाब को धनी लोगों का शौक माना जाता है और यह आज आसानी से उपलभ्द भी है| महिलाओं और पुरुषों का अपना शारीरिक प्रदर्शन आज फैशन बन गया है| इस्लाम इस शारीरिक प्रदर्शन के और धन की लालच में स्त्री पुरुष के शारीरिक सम्बन्ध के खिलाफ है | आप कह सकते हैं की इंसानों का  जंगल के जानवरों की तरह व्यवहार के इस्लाम खिलाफ है | इस्लाम अनैतिक और छुप के शार्रीरिक संबंधों के खिलाफ है और आपसी सहमती से कुछ कानून का पालन करते हुए स्त्री पुरुष आपस में शारीरिक सम्बन्ध बना सकते हैं| इस्लाम आजादी में बाधा नहीं डालता बल्कि इस बात पे जोर देता है की धोका और फरेब पति पत्नी एक दुसरे से ना करें और जो करें समाज में इज्ज़त के साथ करें | जुआ , शराब , अनैतिक संबधों और ऐसे हर नशे के इस्लाम खिलाफ है जिसे करने से इंसान होश खो दे या जिसकी लत लग जाए |

इस्लाम के कानून परिस्थितियों के अनुसार बदलते भी रहे हैं जैसे आप सवाल करें की आपके बच्चे को facebook की लत लग गयी है और इतनी अधिक है की वो अपनी दिनचर्या , पढाई या व्यवसाय के काबिल भी नहीं रहा तो इस्लाम का कानून इसे हराम कह देगा और यदि यही आदत केवल एक शौक है और इसे आपके बच्चे की दिनचर्या पे कोई अंतर नहीं पड़ रहा तो यही सही कहा जायेगा | या आप पूछें क्या पुरुष का स्त्री से बात करना या ऑनलाइन चैट करना या दफ्तरों में एक साथ काम करना मना है? तो जवाब आएगा नहीं कोई हर्ज नहीं यदि ऐसा करने से आप को अनैतिक संबंधों के बनने का डर नहीं | इस्लाम आपको चार शादी की इजाज़त देता है लेकिन यदि इस से समाज में इज्ज़त कम होती हो या पत्नी इसकी इजाज़त नहीं दे रही या आप सभी पत्नियों के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं रख सकते हैं तो ऐसा करना मना है |


इस्लाम इंसान को जीने का सलीका सिखाता है | आपके लिए कब सोना सही है कब जागना सही है ? क्या खाना सही है या क्या पहनना सही है ? कैसे लोगों से मिलना जुलना चाहिए कैसे उठाना बैठना चाहिए ? सभी कुछ इस्लाम में मौजूद है बस आवश्यकता है तो इंसानों के समझने की के इस्लाम है क्या ? यह इंसानों को इंसानियत सीखाता है , समूह में मिल जुल के रहना सिखाता है | आज का मुसलमान यदि इस्लाम के कानून के खिलाफ कुछ करता है तो वो धन दौलत और शोहरत की लालच में करता है | और जो गुनाह करता है वो है झूट बोलना, पीठ पीछे बुराई करना, बेपर्दा महिलाओं का घूमना ,अनैतिक सम्बन्ध बना लेना इत्यादि और यह वही बुराईयाँ है जो हर धर्म का इंसान  अपने अपने धर्म के कानून को तोड़ते हुए लालच में किया करता है |

जिन लोगों ने अपने अपने धर्म की किताबों को बदल लिया है वो आज इश्वर के बताये कानून पे चलने वाले नहीं रह गए है | और बदलाव वही हुआ है जो आज के इंसान की पसंद हैं |ऐसा कर  के इंसान ने खुद अपना ही एक धर्म बना लिया है बस नाम पुराने धर्म का ही चला रहा है | अल्लाह का कोई भी कानून ऐसा नहीं जो इंसान के लिए कोई समस्या पैदा कर दे | यदि किसी पाठक  को कम से कम इस्लाम का कोई कानून ऐसा लगता हो जो आज के युग में जीवन गुज़ारने में बाधक हो तो अवश्य उसका ज़िक्र करें | आपको जवाब मिलेगा और देखेंगे की इस्लाम में हर समस्या का समाधान मौजूद हैं क्यूँ की अल्लाह वो है जिसने दुनिया बनाई, जीव जंतु और इंसान बनाये और वो सब जानता है आने वाले दिनों में इनके सामने कैसी कैसी समस्याएं आ सकती हैं और उनका हल क्या होगा ? 

नोट: मेरा पिछले सप्ताह का लेख था "जो परिवर्तनशील हो वो धर्म नहीं हो सकता |" और आज का यह लेख है "इस्लाम के कानून परिस्थितियों के अनुसार परिवर्तनशील हैं |" कुछ लोगों को इसमें विरोधाभास नज़र आ रहा है जबकि ऐसा है नहीं | धर्म यदि अल्लाह का बनाया है तो इसमें बदलाव लाना इंसान के वश की बात नहीं और यदि ऐसा होगा तो नतीजा गलत ही आएगा |यह मेरे महले वाले लेख का सन्देश था और इस्लाम अल्लाह का दिया धर्म है जो यह जानता है की आने वाले समय में कैसी परिस्थितियां हो सकती है और कैसे बदलाव की आवश्यकता पद सकती है | इसीलिये तो उसे अल्लाह कहते हैं | ऐसे में इस्लाम धर्म के कानून में परिस्थितियों के अनुसार बदलाव का प्राविधान है | अल्लाह की किताब में परिवर्तन केवल अल्लाह का अधिकार है | यह मेरे अभी के लेख का सन्देश है | 
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