हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय

हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम का नाम जाफ़र व आपका मुख्य लक़ब सादिक़ है। हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम हज़रत इमाम बाक़ि...

हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम का नाम जाफ़र व आपका मुख्य लक़ब सादिक़ है।

हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम के पिता हज़रत इमाम हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम व आपकी माता हज़रत उम्मे फ़रवा पुत्री क़ासिम पुत्र मुहम्मद पुत्र अबुबकर हैं।

हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम का जन्म सन् 83 हिजरी के रबी उल अव्वल मास की 17 वी तिथि को पवित्र शहर मदीने मे हुआ था।

हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की शहादत सन् 148 हिजरी क़मरी मे शव्वाल मास की 25 वी तिथि को हुई। अब्बासी शासक मँनसूर दवानक़ी के आदेशानुसार आपको विषपान कराया गया जो आपकी शहादत का कारण बना।

हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम की समाधि पवित्र शहर मदीने के जन्नःतुल बक़ी नामक कब्रिस्तान मे है। यह शहर वर्तमान समय मे सऊदी अरब मे है।


हज़रत इमाम सदिक़ अलैहिस्सलाम का शिक्षा अभियान

हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने इस्लामी समाज मे शिक्षा केप्रचार व प्रसार हेतू एक महान अभियान शुरू किया। शिक्षण कार्य के लिए उन्होने पवित्र स्थान मस्जिदे नबवी को चुना तथा वहा पर बैठकर शिक्षा का प्रसार व प्रचार आरम्भ किया। ज्ञान के प्यासे मनुष्य दूर व समीप से आकर उनकी कक्षा मे सम्मिलित होते तथा प्रश्नो उत्तर के रूप मे अपने ज्ञान मे वृद्धि करते थे।



आप के इस अभियान का मुख्य कारण बनी उमैय्या व बनी अब्बास के शासन काल मे इस्लामी समाज मे आये परिवर्तन थे। इनके शासन काल मे यूनानी, फ़ारसी व हिन्दी भाषा की पुस्तकों का अरबी भाषा मे अनुवाद मे हुआ। जिसके परिणाम स्वरूप मुसलमानों के आस्था सम्बन्धि विचारो मे विमुख्ता फैल गयी। तथा ग़ुल्लात, ज़िन्दीक़ान, जाएलाने हदीस, अहले राए व मुतासव्वेफ़ा जैसे अनेक संमूह उत्पन्न हुए। इस स्थिति मे हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम के लिए अवश्यक था कि इस्लामी समाज मे फैली इस विमुख्ता को दूर किया जाये। अतः हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने अपने ज्ञान के आधार पर समस्त विचार धाराओं को निराधार सिद्ध किया। व समाज मे शिक्षा का प्रसार व प्रचार करके समाज को धार्मिक विघटन से बचा लिया। तथा समाज को आस्था सम्बन्धि विचारों धार्मिक निर्देशों व नवीनतम ज्ञान से व्यापक रूप से परिचित कराया। तथा अपने ज्ञान के आधार पर एक विशाल जन समूह को शिक्षित करके समाज के हवाले किया। ताकि वह समाज को शिक्षा के क्षेत्र मे और उन्नत बना सकें।



आपके मुख्य शिष्यों मे मालिक पुत्र अनस, अबु हनीफ़ा, मुहम्द पुत्र हसने शेबानी, सुफ़याने सूरी, इबने अयीनेह, याहिया पुत्र सईद, अय्यूब सजिस्तानी, शेबा पुत्र हज्जाज, अब्दुल मलिक जरीह अत्यादि थे।



जाहिज़ नामक विद्वान हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम के शिक्षा प्रसार के सम्बन्ध मे लिखते है कि-



हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने ज्ञान रूपी नदियां पृथ्वी पर बहाई व मानवता को ज्ञान रूपी ऐसा समुन्द्र प्रदान किया जो इससे पहले मानवता को प्राप्त न था। समस्त संसार ने अपके ज्ञान से अपनी प्यास बुझाई।



हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम विद्वानो की दृष्टि मे

अबुहनीफ़ा की दृष्टि मे

सुन्नी समुदाय के प्रसिद्ध विद्वान अबु हनीफ़ा कहते हैं कि मैं ने हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम से बड़ा कोई विद्वान नही देखा। वह यह भी कहते हैं कि अगर मैं हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्लाम से दो साल तक ज्ञान प्राप्त न करता तो हलाक हो जाता। अर्थात उन के बिना कुछ भी न जान पाता।



इमाम मालिक की दृष्टि मे

सुन्नी समप्रदाय के प्रसिद्ध विद्वान इमाम मालिक कहते हैं कि मैं जब भी हज़रत इमाम सादिक़ के पास जाता था उनको इन तीन स्थितियों मे से किसी एक मे देखता था। या वह नमाज़ पढ़ते होते थे, या रोज़े से होते थे, या फिर कुऑन पढ़ रहे होते थे। वह कभी भी वज़ू के बिना हदीस का वर्णन नही करते थे।



इब्ने हजरे हीतमी की दृष्टि मे

इब्ने हजरे हीतमी कहते हैं कि हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम से ज्ञान के इतने स्रोत फूटे कि आम जनता भी उनके ज्ञान के गुण गान करने लगी। तथा उनके ज्ञान का प्रकाश सब जगह फैल गया। फ़िक्ह व हदीस के बड़े बड़े विद्वानों ने उनसे हदीसें नक्ल की हैं।



अबु बहर जाहिज़ की दृष्टि मे

अबु जाहिज़ कहते हैं कि हज़रत इमाम सादिक़ वह महान् व्यक्ति हैं जिनके ज्ञान ने समस्त संसार को प्रकाशित किया। कहा जाता है कि अबू हनीफ़ा व सुफ़याने सूरी उनके शिष्यों मे से थे। हज़रत इमाम सादिक़ का इन दो विद्वानो का गुरू होना यह सिद्ध करता है कि वह स्वंय एक महानतम विद्वान थे।



इब्ने ख़ल्लकान की दृष्टि मे

प्रसिद्ध इतिहासकार इब्ने ख़ल्लकान ने लिखा है कि हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम शियों के इमामिया सम्प्रदाय के बारह इमामो मे से एक हैं। व हज़रत पैगम्बर(स.) के वँश के एक महान व्यक्ति हैं। उनकी सत्यता के कारण उनको सादिक़ कहा जाता है। (सादिक़ अर्थात सत्यवादी) उनकी श्रेष्ठता व महानता किसी परिचय की मोहताज नही है। अबूमूसा जाबिर पुत्र हय्यान तरतूसी उनका ही शिष्य था।



शेख मुफ़ीद की दृष्टि मे

शेख मुफ़ीद कहते हैं कि हज़रत इमाम सादिक़ अलैहिस्सलाम ने ज्ञान को इतना अधिक फैलाया कि वह जनता मे प्रसिद्ध हो गये। व उनके ज्ञान का प्रकाश सभी स्थानों पर पहुँचा।



।।अल्लाहुम्मा सल्ले अला मुहम्मद वा आले मुहम्मद।।
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