कुरआन की चालीस ‘रब्बना’ दुआ

४० कुरआन की ‘रब्बना’ दुआ क्रम अरबी Arebic – English हिंदी अनुवाद English Translation 1 رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا إ...


४० कुरआन की ‘रब्बना’ दुआ

क्रम
अरबी
Arebic – English
हिंदी अनुवाद
English Translation
1
رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا إِنَّكَ أَنْتَ السَّمِيعُ العَلِيمُ [البقرة :127]
Rabbana taqabbal minna innaka antas Sameeaul Aleemऐ हमारे परवरदिगार हमारी (ये ख़िदमत) कुबूल कर बेशक तू ही (दूआ का) सुनने वाला (और उसका) जानने वाला है (सुरह बकरह:127)Our Lord! Accept (this service) from us: For Thou art the All-Hearing, the All-knowing [2:127]
2
رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَآ إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ [البقرة :128]
Rabbana wa-j’alna Muslimayni laka ma min Dhurriyatina ‘Ummatan Muslimatan laka wa ‘Arina Manasikana wa tub ‘alayna ‘innaka ‘antat-Tawwabu-Raheemऐ हमारे पालने वाले तू हमें अपना फरमाबरदार बन्दा बना हमारी औलाद से एक गिरोह (पैदा कर) जो तेरा फरमाबरदार होऔर हमको हमारे हज की जगहों दिखा दे और हमारी तौबा क़ुबूल करबेशक तू ही बड़ा तौबा कुबूल करने वाला मेहरबान है (सुरह बकरह:128)Our Lord! Make of us Muslims, bowing to Thy (Will), and of our progeny a people Muslim, bowing to Thy (will); and show us our place for the celebration of (due) rites; and turn unto us (in Mercy); for Thou art the Oft-Returning, Most Merciful [2:128]
3
رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ [البقرة :201]
Rabbana atina fid-dunya hasanatan wa fil ‘akhirati hasanatan waqina ‘adhaban-narऐ मेरे पालने वाले, मुझे दुनिया में नेअमत दे और आख़िरत में सवाब दे और दोज़ख़ की बाग से बचा (सुरह बकरह:201)Our Lord! Grant us good in this world and good in the hereafter, and save us from the chastisement of the fire [2:201]
4
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْراً وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى القَوْمِ الكَافِرِينَ [البقرة :250]
Rabbana afrigh ‘alayna sabran wa thabbit aqdamana wansurna ‘alal-qawmil-kafirinऐ मेरे परवरदिगार हमें कामिल सब्र अता फरमा और मैदाने जंग में हमारे क़दम जमाए रख और हमें काफिरों पर फतेह इनायत कर (सुरह बकरह:250)Our Lord! Bestow on us endurance, make our foothold sure, and give us help against the disbelieving folk [2:250]
5
رَبَّنَا لاَ تُؤَاخِذْنَا إِن نَّسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا [البقرة :286]
Rabbana la tu’akhidhna in-nasina aw akhta’naऐ हमारे परवरदिगार अगर हम भूल जाऐं या ग़लती करें तो हमारी गिरफ्त न कर (सुरह बकरह:286)Our Lord! Condemn us not if we forget or fall into error [2:286]
6
رَبَّنَا وَلاَ تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِنَا [البقرة :286]
Rabbana wala tahmil alayna isran kama hamaltahu ‘alal-ladheena min qablinaऐ हमारे परवरदिगार हम पर वैसा बोझ न डाल जैसा हमसे अगले लोगों पर बोझा डाला था (सुरह बकरह:286)Our Lord! Lay not on us a burden Like that which Thou didst lay on those before us [2:286]
7
رَبَّنَا وَلاَ تُحَمِّلْنَا مَا لاَ طَاقَةَ لَنَا بِهِ وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا أَنتَ مَوْلاَنَا فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ [البقرة :286]
Rabbana wala tuhammilna ma la taqata lana bihi wa’fu anna waghfir lana wairhamna anta mawlana fansurna ‘alal-qawmil kafireenऐ हमारे परवरदिगार इतना बोझ जिसके उठाने की हमें ताक़त न हो हमसे न उठवा और हमारे कुसूरों से दरगुज़र कर और हमारे गुनाहों को बख्श दे और हम पर रहम फ़रमा तू ही हमारा मालिक है तू ही काफ़िरों के मुक़ाबले में हमारी मदद कर (सुरह बकरह:286)Our Lord! Lay not on us a burden greater than we have strength to bear. Blot out our sins, and grant us forgiveness. Have mercy on us. Thou art our Protector; Help us against those who stand against faith [2:286]
8
رَبَّنَا لاَ تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ [آل عمران:8]
Rabbana la tuzigh quloobana ba’da idh hadaytana wa hab lana milladunka rahmah innaka antal Wahhabऐ हमारे पालने वाले हमारे दिल को हिदायत करने के बाद डॉवाडोल न कर और अपनी बारगाह से हमें रहमत अता फ़रमा इसमें तो शक ही नहीं कि तू बड़ा देने वाला है (सुरह आले इमरान:8)Our Lord! (they say), Let not our hearts deviate now after Thou hast guided us, but grant us mercy from Thine own Presence; for Thou art the Grantor of bounties without measure [3:8]
9
رَبَّنَا إِنَّكَ جَامِعُ النَّاسِ لِيَوْمٍ لاَّ رَيْبَ فِيهِ إِنَّ اللّهَ لاَ يُخْلِفُ الْمِيعَادَ [آل عمران :9]
Rabbana innaka jami’unnasi li-Yawmil la rayba ri innAllaha la yukhliful mi’aadऐ हमारे परवरदिगार बेशक तू एक न एक दिन जिसके आने में शुबह नहीं लोगों को इक्ट्ठा करेगा (तो हम पर नज़रे इनायत रहे) बेशक अल्लाह अपने वायदे के ख़िलाफ़ नहीं करता (सुरह आले इमरान:9)Our Lord! Thou art He that will gather mankind Together against a day about which there is no doubt; for Allah never fails in His promise. [3:9]
10
رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ [آل عمران :16]
Rabbana innana amanna faghfir lana dhunuubana wa qinna ‘adhaban-Naarहमारे पालने वाले हम तो (बेताम्मुल) ईमान लाए हैं पस तू भी हमारे गुनाहों को बख्श दे और हमको दोज़ख़ के अज़ाब से बचा (सुरह आले इमरान:16)Our Lord! We have indeed believed: forgive us, then, our sins, and save us from the agony of the Fire [3:16]
11
رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلَتْ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَِ [آل عمران :53]
Rabbana amanna bima anzalta wattaba ‘nar-Rusula fak-tubna ma’ash-Shahideenऐ हमारे पालने वाले जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उसपर ईमान लाए और हमने तेरे रसूल की पैरवी इख्तेयार की पस तू हमें (अपने रसूल के) गवाहों के दफ्तर में लिख ले (सुरह आले इमरान:54)Our Lord! We believe in what Thou hast revealed, and we follow the Messenger. Then write us down among those who bear witness [3:54]
12
ربَّنَا اغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِي أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَِ [آل عمران :147]
Rabbana-ghfir lana dhunuubana wa israfana fi amrina wa thabbit aqdamana wansurna ‘alal qawmil kafireenऐ हमारे पालने वाले हमारे गुनाह और अपने कामों में हमारी ज्यादतियॉ माफ़ कर और दुश्मनों के मुक़ाबले में हमको साबित क़दम रख और काफ़िरों के गिरोह पर हमको फ़तेह दे (सुरह आले इमरान:147)Our Lord! Forgive us our sins and anything We may have done that transgressed our duty: Establish our feet firmly, and help us against those that resist Faith [3:147]
13
رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَذا بَاطِلاً سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ [آل عمران :191]
Rabbana ma khalaqta hadha batila Subhanaka faqina ‘adhaban-Naarअल्लाहवन्दा तूने इसको बेकार पैदा नहीं किया तू (फेले अबस से) पाक व पाकीज़ा है बस हमको दोज़क के अज़ाब से बचा (सुरह आले इमरान:191)Our Lord! Not for naught Hast Thou created (all) this! Glory to Thee! Give us salvation from the penalty of the Fire [3:191]
14
رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ [آل عمران :192]
Rabbana innaka man tudkhilin nara faqad akhzaytah wa ma liDh-dhalimeena min ansarऐ हमारे पालने वाले जिसको तूने दोज़ख़ में डाला तो यक़ीनन उसे रूसवा कर डाला और जुल्म करने वाले का कोई मददगार नहीं (सुरह आले इमरान:192)Our Lord! Any whom Thou dost admit to the Fire, Truly Thou coverest with shame, and never will wrong-doers Find any helpers! [3:192]
15
رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلإِيمَانِ أَنْ آمِنُواْ بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا [آل عمران :193]
Rabbana innana sami’na munadiyany-yunadi lil-imani an aminu bi Rabbikum fa’aamannaऐ हमारे पालने वाले (जब) हमने एक आवाज़ लगाने वाले (पैग़म्बर) को सुना कि वह (ईमान के वास्ते यूं पुकारता था) कि अपने परवरदिगार पर ईमान लाओ तो हम ईमान लाए (सुरह आले इमरान:193)Our Lord! We have heard the call of one calling (Us) to Faith, ‘Believe ye in the Lord,’ and we have believed. [3:193]
16
رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الأبْرَارِ [آل عمران :193]
Rabbana faghfir lana dhunoobana wa kaffir ‘ana sayyi’aatina wa tawaffana ma’al Abrarपस ऐ हमारे पालने वाले हमें हमारे गुनाह बख्श दे और हमारी बुराईयों को हमसे दूर करे दे और हमें नेकों के साथ (दुनिया से) उठा ले (सुरह आले इमरान:193)Our Lord! Forgive us our sins, blot out from us our iniquities, and take to Thyself our souls in the company of the righteous [3:193]
17
رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَى رُسُلِكَ وَلاَ تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ إِنَّكَ لاَ تُخْلِفُ الْمِيعَاد [آل عمران :194]
Rabbana wa ‘atina ma wa’adtana ‘ala rusulika wa la tukhzina yawmal-Qiyamah innaka la tukhliful mi’aadऐ पालने वाले अपने रसूलों की मार्फत जो कुछ हमसे वायदा किया है हमें दे और हमें क़यामत के दिन रूसवा न कर तू तो वायदा ख़िलाफ़ी करता ही नहीं (सुरह आले इमरान:194)Our Lord! Grant us what Thou didst promise unto us through Thine apostles, and save us from shame on the Day of Judgment: For Thou never breakest Thy promise [3:194]
18
رَبَّنَا آمَنَّا فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ [المائدة :83]
Rabbana aamana faktubna ma’ ash-shahideenऐ मेरे पालने वाले हम तो ईमान ला चुके तो (रसूल की) तसदीक़ करने वालों के साथ हमें भी लिख रख (सुरह अल माइदा:83)Our Lord! We believe; write us down among the witnesses. [5:83]
19
رَبَّنَا أَنزِلْ عَلَيْنَا مَآئِدَةً مِّنَ السَّمَاء تَكُونُ لَنَا عِيداً لِّأَوَّلِنَا وَآخِرِنَا وَآيَةً مِّنكَ وَارْزُقْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ [المائدة :114]
Rabbana anzil ‘alayna ma’idatam minas-Samai tuknu lana ‘idal li-awwa-lina wa aakhirna wa ayatam-minka war-zuqna wa anta Khayrul-Raziqeenअल्लाह वन्दा ऐ हमारे पालने वाले हम पर आसमान से एक ख्वान (नेअमत) नाज़िल फरमा कि वह दिन हम लोगों के लिए हमारे अगलों के लिए और हमारे पिछलों के लिए ईद का करार पाए (और हमारे हक़ में) तेरी तरफ से एक बड़ी निशानी हो और तू हमें रोज़ी दे और तू सब रोज़ी देने वालो से बेहतर है (सुरह अल माइदा:114)O Allah our Lord! Send us from heaven a table set (with viands), that there may be for us – for the first and the last of us – a solemn festival and a sign from thee; and provide for our sustenance, for thou art the best Sustainer (of our needs) [5:114]
20
رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ [الأعراف :23]
Rabbana zalamna anfusina wa il lam taghfir lana wa tarhamna lana kuna minal-khasireenऐ हमारे पालने वाले हमने अपना आप नुकसान किया और अगर तू हमें माफ न फरमाएगा और हम पर रहम न करेगा तो हम बिल्कुल घाटे में ही रहेगें (सुरह अल-आराफ़:23)Our Lord! We have wronged our own souls: If thou forgive us not and bestow not upon us Thy Mercy, we shall certainly be lost. [7:23]
21
رَبَّنَا لاَ تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ [الأعراف :47]
Rabbana la taj’alna ma’al qawwmi-dhalimeenऐ हमारे परवरदिगार हमें ज़ालिम लोगों का साथी न बनाना (सुरह अल-आराफ़:47)Our Lord! Send us not to the company of the wrong-doers [7:47]
22
رَبَّنَا افْتَحْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّ وَأَنتَ خَيْرُ الْفَاتِحِينَ [الأعراف :89]
Rabbana afrigh bayana wa bayna qawmina bil haqqi wa anta Khayrul Fatiheenऐ हमारे परवरदिगार तू ही हमारे और हमारी क़ौम के दरमियान ठीक ठीक फैसला कर दे और तू सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है (सुरह अल-आराफ़:89)Our Lord! Decide Thou between us and our people in truth, for Thou art the best to decide. [7:89]
23
رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ [الأعراف :126]
Rabbana afrigh ‘alayna sabraw wa tawaffana Muslimeenऐ हमारे परवरदिगार हम पर सब्र (का मेंह बरसा) और हमने अपनी फरमाबरदारी की हालत में दुनिया से उठा ले (सुरह अल-आराफ़:126)Our Lord! Pour out on us patience and constancy, and take our souls unto thee as Muslims (who bow to thy will)! [7:126]
24
رَبَّنَا لاَ تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ ; وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ [يونس :85-86]
Rabbana la taj’alna firnatal lil-qawmidh-Dhalimeen wa najjina bi-Rahmatika minal qawmil kafireenऐ हमारे पालने वाले तू हमें ज़ालिम लोगों का (ज़रिया) इम्तिहान न बना और अपनी रहमत से हमें इन काफ़िर लोगों (के नीचे) से नजात देOur Lord! Make us not a trial for those who practice oppression; And deliver us by Thy Mercy from those who reject (Thee) [10:85-86]
25
رَبَّنَا إِنَّكَ تَعْلَمُ مَا نُخْفِي وَمَا نُعْلِنُ وَمَا يَخْفَى عَلَى اللّهِ مِن شَيْءٍ فَي الأَرْضِ وَلاَ فِي السَّمَاء [إبرهيم :38]
Rabbana innaka ta’iamu ma nukhfi wa ma nu’lin wa ma yakhfa ‘alal-lahi min shay’in fil-ardi wa la fis-Sama’ऐ हमारे पालने वाले जो कुछ हम छिपाते हैं और जो कुछ ज़ाहिर करते हैं तू (सबसे) खूब वाक़िफ है और अल्लाह से तो कोई चीज़ छिपी नहीं (न) ज़मीन में और न आसमान में (सुरह इब्राहीम:38)O our Lord! Truly Thou dost know what we conceal and what we reveal: for nothing whatever is hidden from Allah, whether on earth or in heaven [14:38]
26
رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاء [إبرهيم :40]
Rabbana wa taqabbal Du’aऐ मेरे पालने वाले मेरी दुआ क़ुबूल फरमा ((सुरह इब्राहीम:40)O our Lord! And accept my Prayer. [14:40]
27
رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ [إبرهيم :41]
Rabbana ghfir li wa li wallidayya wa lil Mu’mineena yawma yaqumul hisaabऐ हमारे पालने वाले जिस दिन (आमाल का) हिसाब होने लगे मुझको और मेरे माँ बाप को और सारे ईमानदारों को तू बख्श दे (सुरह इब्राहीम:41)O our Lord! Cover (us) with Thy Forgiveness – me, my parents, and (all) Believers, on the Day that the Reckoning will be established! [14:41]
28
رَبَّنَا آتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا [الكهف :10]
Rabbana ‘atina mil-ladunka Rahmataw wa hayya lana min amrina rashadaऐ हमारे परवरदिगार हमें अपनी बारगाह से रहमत अता फरमा-और हमारे वास्ते हमारे काम में कामयाबी इनायत कर (सुरह अल-कहफ़:10)Our Lord! Bestow on us Mercy from Thyself, and dispose of our affair for us in the right way! [18:10]
29
رَبَّنَا إِنَّنَا نَخَافُ أَن يَفْرُطَ عَلَيْنَا أَوْ أَن يَطْغَى [طه :45]
Rabbana innana nakhafu any-yafruta ‘alayna aw any-yatghaऐ हमारे पालने वाले हम डरते हैं कि कहीं वह हम पर ज्यादती (न) कर बैठे या ज्यादा सरकशी कर ले (सुरह ताःहाः45)Our Lord! We fear lest he hasten with insolence against us, or lest he transgress all bounds [20: 45]
30
رَبَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ [المؤمنون :109]
Rabbana amanna faghfir lana warhamna wa anta khayrur Rahimiinऐ हमारे पालने वाले हम ईमान लाए तो तू हमको बख्श दे और हम पर रहम कर तू तो तमाम रहम करने वालों से बेहतर है (सुरह अल-मोमिनून:109)Our Lord! We believe; then do Thou forgive us, and have mercy upon us: For Thou art the Best of those who show mercy [23: 109]
31
رَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَ إِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا إِنَّهَا سَاءتْ مُسْتَقَرًّا وَمُقَامًا [الفرقان :65-66]
Rabbanas-rif ‘anna ‘adhaba jahannama inna ‘adhabaha kana gharama innaha sa’at musta-qarranw wa muqamaपरवरदिगारा हम से जहन्नुम का अज़ाब फेरे रहना क्योंकि उसका अज़ाब बहुत (सख्त और पाएदार होगा) बेशक वह बहुत बुरा ठिकाना और बुरा मक़ाम है (सुरह अल-फुर्क़ान:65-66)Our Lord! Avert from us the Wrath of Hell, for its Wrath is indeed an affliction grievous,- Evil indeed is it as an abode, and as a place to rest in. [25: 65-66]
32
رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا [الفرقان :74]
Rabbana Hablana min azwaajina wadhurriy-yatina, qurrata ‘ayioni wa-jalna lil-muttaqeena Imaamaपरवरदिगार हमें हमारी बीबियों और औलादों की तरफ से ऑंखों की ठन्डक अता फरमा और हमको परहेज़गारों का पेशवा बना (सुरह अल-फुर्क़ान:74)O my Lord! Grant unto us wives and offspring who will be the comfort of our eyes, and give us (the grace) to lead the righteous [25:74]
33
رَبَّنَا لَغَفُورٌ شَكُورٌ [فاطر :34]
Rabbana la Ghafurun shakurबेशक हमारा परवरदिगार बड़ा बख्शने वाला (और) क़दरदान है (सुरह फ़ातिर:34)Our Lord is indeed Oft-Forgiving Ready to appreciate (service) [35: 34]
34
آمَنُوا رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَبِيلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ [غافر :7]
Rabbana wasi’ta kulla sha’ir Rahmatanw wa ‘ilman faghfir lilladhina tabu wattaba’u sabilaka waqihim ‘adhabal-Jahiimपरवरदिगार तेरी रहमत और तेरा इल्म हर चीज़ पर अहाता किए हुए हैंतो जिन लोगों ने (सच्चे) दिल से तौबा कर ली और तेरे रास्ते पर चले उनको बख्श दे और उनको जहन्नुम के अज़ाब से बचा ले (सुरह अल-मोमिन:7)Our Lord! Thy Reach is over all things, in Mercy and Knowledge. Forgive, then, those who turn in Repentance, and follow Thy Path; and preserve them from the Penalty of the Blazing Fire! [40:7]
35
رَبَّنَا وَأَدْخِلْهُمْ جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدتَّهُم وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ وَقِهِمُ السَّيِّئَاتِ وَمَن تَقِ السَّيِّئَاتِ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمْتَهُ وَذَلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ [غافر :8-9]
Rabbana wa adhkhilum Jannati ‘adninil-lati wa’attahum wa man salaha min aba’ihim wa azajihim wa dhuriyyatihim innaka antal ‘Azizul-Hakim, waqihimus sayyi’at wa man taqis-sayyi’ati yawma’idhin faqad rahimatahu wa dhalika huwal fawzul-’Adheemऐ हमारे पालने वाले इन को सदाबहार बाग़ों में जिनका तूने उन से वायदा किया है दाख़िल कर और उनके बाप दादाओं और उनकी बीवीयों और उनकी औलाद में से जो लोग नेक हो उनको (भी बख्श दें) बेशक तू ही ज़बरदस्त (और) हिकमत वाला है.
और उनको हर किस्म की बुराइयों से महफूज़ रख और जिसको तूने उस दिन ( कयामत ) के अज़ाबों से बचा लिया उस पर तूने बड़ा रहम किया और यही तो बड़ी कामयाबी है (सुरह अल-मोमिन:8-9)
And grant, our Lord! that they enter the Gardens of Eternity, which Thou hast promised to them, and to the righteous among their fathers, their wives, and their posterity! For Thou art (He), the Exalted in Might, Full of Wisdom. And preserve them from (all) ills; and any whom Thou dost preserve from ills that Day,- on them wilt Thou have bestowed Mercy indeed: and that will be truly (for them) the highest Achievement. [40:8-9]
36
رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ وَلَا تَجْعَلْ فِي قُلُوبِنَا غِلًّا لِّلَّذِينَ آمَنُوا [الحشر :10]
Rabbana-ghfir lana wa li ‘ikhwani nalladhina sabaquna bil imani wa la taj’al fi qulubina ghillal-lilladhina amanuपरवरदिगारा हमारी और उन लोगों की जो हमसे पहले ईमान ला चुके मग़फेरत कर और मोमिनों की तरफ से हमारे दिलों में किसी तरह का कीना न आने दे (सुरह अल-हश्र:10)Our Lord! Forgive us, and our brethren who came before us into the Faith, and leave not, in our hearts, rancour (or sense of injury) against those who have believed. [59:10]
37
رَبَّنَا إِنَّكَ رَؤُوفٌ رَّحِيمٌ [الحشر :10]
Rabbana innaka Ra’ufur Rahimपरवरदिगार बेशक तू बड़ा यफीक़ निहायत रहम वाला है (सुरह अल-हश्र:10)Our Lord! Thou art indeed Full of Kindness, Most Merciful. [59:10]
38
رَّبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ [الممتحنة :4]
Rabbana ‘alayka tawakkalna wa-ilayka anabna wa-ilaykal masirऐ हमारे पालने वालेहमने तुझी पर भरोसा कर लिया है और तेरी ही तरफ हम रूजू करते हैं (सुरह अल-मुम्तहीना:4)Our Lord! In Thee do we trust, and to Thee do we turn in repentance: to Thee is (our) Final Goal [60:4]
39
رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ [الممتحنة :5]
Rabbana la taj’alna fitnatal lilladhina kafaru waghfir lana Rabbana innaka antal ‘Azizul-Hakimऐ हमारे पालने वाले तू हम लोगों को काफ़िरों की आज़माइश (का ज़रिया) न क़रार दे और परवरदिगार तू हमें बख्श दे बेशक तू ग़ालिब (और) हिकमत वाला है (सुरह अल-मुम्तहीना:5)Our Lord! Make us not a (test and) trial for the Unbelievers, but forgive us, our Lord! for Thou art the Exalted in Might, the Wise. [60:5]
40
رَبَّنَا أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَا إِنَّكَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ [التحريم :8]
Rabbana atmim lana nurana waighfir lana innaka ‘ala kulli shay-in qadirऐ परवरदिगार हमारे लिए हमारा नूर पूरा कर और हमें बख्य दे बेशक तू हर चीज़ पर कादिर है (सुरह अत-तहरीम:8)Our Lord! Perfect our Light for us, and grant us Forgiveness: for Thou hast power over all things. [66:8]

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