बीमारी तीन तरह की है और दवा भी तीन तरह की है,

इरशादाते पैग़म्बरे इस्लाम अलैहिस्सलाम बीमारी तीन तरह की है और दवा भी तीन तरह की है, बीमारी ख़ून, सफ़रा और बलग़म से है, दवाये ख़ून हजामत...

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इरशादाते पैग़म्बरे इस्लाम अलैहिस्सलाम

  • बीमारी तीन तरह की है और दवा भी तीन तरह की है, बीमारी ख़ून, सफ़रा और बलग़म से है, दवाये ख़ून हजामत, दवाये बलग़म नहाना और दवाये सफ़रा चलना है।

  • परवरदिगार ने कोई मर्ज़ नहीं पैदा किया मगर यह कि उसकी दवा भी पैदा की, सिवाये मौत के।

  • ग़िज़ा उस वक्त खाओ जब ख्वाहिश हो और उस वक्त ग़िज़ा से हाथ रोक लो जब खाने की ख्वाहिश बाक़ी हो।

  • ख़ुदा के नज़दीक बेहतरीन और महबूब खाना वह है जिसकी तरफ़ ज़्यादा हाथ बढ़ें। (खाना साथ में खायें)

  • एक उँगली से खाना खाना शैतान का तरीक़ा है, दो उँगलियों से खाना खाना मुताकब्बेरीन (घमण्डियों) का तरीक़ा है और तीन उँगलियों से खाना खाना पैग़म्बरों का तरीक़ा है।

  • खाने को ठण्डा करके खाओ कि गरम खाने में बरकत नहीं है।

  • ग़िज़ा खाने के वक़्त जूतों को उतार दो कि तुम्हारे पैरों को राहत होगी और यह तरीक़ा पसन्दीदा है।

  • नौकरों के साथ खाना खाओ के यह तरीक़ा तवाज़ों और इन्केसारी का है, जो नौकरों के साथ खाना खाता है बहिश्त उसकी मुश्ताक़ होती है।

  • बाज़ार में खाना खाना पस्त और नापसन्दीदा तरीक़ा है।

  • मोमिन वह खाना खाता है जो घर के अफ़राद को पसन्द होता है और मुनाफ़िक़ घर के अफ़राद को वह खाना किखलाता है, जो ख़ुद पसन्द करता है।

  • दस्तरख्वान पर मुख्तलिफ़ ग़िज़ाओं को एक साथ न खाओ।

  • पाँच चीज़ें ज़िन्दगी भर मेरी सीरत में रहेंगी। ख़ाक पर बैठकर खाना खाना, खच्चर की सवारी करना, बकरी दुहना, अदना कपड़े पहनना, बच्चों को सलाम करना ताकि क़ौम की सीरत बन जाये।

  • जब खाना दस्तरख्वान पर खाओ तो खाना अपने सामने के हिस्से से लो, खाने के दरमियान और ऊपरी हिस्से में बरकत होती है और तुममें से कोई भी खाना खाने से हाथ न रोके और दस्तरख्वान से न उठे यहाँ तक कि सभी अफ़राद सेर होकर उठ जायें क्योंकि दूसरों से पहले खाने से हाथ रोकना और खड़े हो जाना उनकी शरमिन्दगी का सबब होगा।

  • बरकत तीन चीज़ों में हैः एक साथ खाने में, (वक्ते) सहर खाने में और जिस खाने में तरी हो।

  • जो बरतन में बची हुई ग़िज़ा को खाता है तो बरतन उसके लिये अस्तग़फ़ार करता है।

  • जो भी दस्तरख्वान पर गिरे हुए टुकड़ों को खाता है, जब तक ज़िन्दा रहता है रोज़ी में इज़ाफ़ा होता है और बच्चे हराम से महफ़ूज़ रहते हैं।


शिकम पुर होकर खाना खाने के नुक़सान
  • ज़्यादा ग़िज़ा न खाओ कि क़ल्ब सख़्त करता है, आज़ा व जवारेह में सुस्ती पैदा करता है और वाज़ व अहकामे इलाही को सुनने से दिल को बेबहरा करता है।

  • जोशख़्स ग़िज़ा कम खाये जिस्म उसका सही और क़ल्ब उसका नूरानी होगा और जो शख़्स ग़िज़ा बहुत खाये जिस्म उसका बीमार और दिल में उसके सख्ती पैदा होती है।

  • एक बार दिन में और एक बार रात में ग़िज़ा खाओ।

  • ग़िज़ा खाने के बाद अपने दाँतों में खि़लाल करो और मुँह में पानी हिलाकर कुल्ली करो, क्योंकि यह अमल सामने के दाँतों और अक्ल की सेहत और सलामती का सबब है।

  • अपने दाँतों में खि़लाल करो कि पाकीज़गी और सफ़ाई का सबब है और सफ़ाई ईमान से है और ईमान अपने साहब की बहिश्त तक हमराही करता है।

पानीः
पानी खड़े होकर रात में नहीं पीना चाहिये।
पानी को घूँट घूँट करके पियो एक साथ न पियो।
जो पानी पीने में तीन बार साँस लेता है ईमान में रहेगा।
बेहतरीन सदक़ा और एहसान पानी देना है।
बेहतरीन पीने की शय दुनिया और आखि़रत में पानी है।


रोटी
तुम्हारी बेहतरीन ग़िज़ा रोटी और बेहतरीन फल अंगूर है।
रोटी को चाक़ू से न काटो और रोटी की क़द्र व क़ीमत समझो कि ख़ुदा ने उसका एहतेराम किया है।

नमकः
ग़िज़ा खाने से पहले अगर कोई तीन लुक़मा नमक से खाये तो सत्तर तरह की बीमारियां उससे दूर होंगी जिनमें से बाज़ यह हैं ः जुनून, जुज़ाम और बरस
जो हर खाना खाने से पहले और बाद में नमक खाता है तो ख़ुदावन्दा 73 तरह की बलाओं और अमराज़ को उससे दूर करता है।
ग़िज़ा को नमक से शुरू करो कि यह सत्तर अमराज़ की दवा है।
अगर लोग नमक की ख़ूबियों से वाक़िफ़ होते तो किसी दवा के मोहताज न होते।


गोश्त
गोश्त खाना बदन के गोश्त में इज़ाफ़ा करता है। जो चालीस दिन गोश्त न खाये उसका क़ल्ब ख़राब हो जाता है।
चालीस दिन (लगातार) गोश्त का खाना क़ल्ब में सख़्ती और तारीकी पैदा करता है। (गोश्त खाना सुन्नते पैग़म्बर स0 है इसलिये तर्क न करे लेकिन ज़ियादती नुक्सानदेह है एक दिन में दो बार गोश्त न खाओ।)


चावलः
खाने में चावल की मिसाल ऐसी है जैसे क़ौम और क़बीले में सय्यद व आक़ा की।


दूधः
अपनी हामिला औरतों को दूध पिलाओ ताकि तुम्हारे बच्चों की अक़्ल ज़्यादा हो।
दूध पीने के बाद कुल्ली करो कि दूध में चर्बी होती है जो मुँह में बाक़ी रह जाती है।
दूध पीना ईमान को ख़ालिस करता है।


मिसवाकः
या अली अ0 तुमको चाहिये कि मिसवाक हर वुज़ू के लिये करो।
मिसवाक आँखों को रोशन करती है, बालों को उगाती है और दूर करती है आँखों से पानी निकलने को।
मिसवाक का ज़्यादा करना इन्सान के लिये उसकी फसाहत को ज़्यादा करता है।


फलः
फलों को फस्ल के आग़ाज़ (शुरू) में और पकने पर खाओ कि बदन को सालिम और ग़म को दूर करते हैं। फ़सल ख़त्म होने पर न खाओ, कि बदन में बीमारी का सबब होते हैं।
जो फलों को अलग-अलग खाता है उसे नुक़सान नहीं पहुँचता।
फल के छिलके पर ज़हर होता है जब खाओ तो धो लिया करो।


ख़ुरमाः

बच्चे की विलादत के बाद माँ को सबसे पहले जो चीज़ खानी चाहिये वह मीठा ख़ुरमा है क्योंकि अगर इससे बेहतर कोई चीज़ होती तो परवरदिगार जनाबे मरियम को उसी से तआम कराता।
नाशते में ख़ुरमा खाओ कि बदन के कीड़ों को ख़त्म करता है।
जो  ख़ुरमा हासिल कर सकता है उसे चाहिये कि ख़ुरमे से अफ़तार करे।
ख़ुरमा अल्लाह से क़ुरबत का और शैतान से दूरी का बाएस है।


ख़रबूज़ा


ख़रबूज़े को फल की जगह खाओ और दाँतों से खाओ (छील कर नहीं) कि उसका पानी रहमत है, उसकी मिठास ईमान की मिठास है जो उसका एक टुकड़ा खाता है परवरदिगार उसे सत्तर हज़ार नेकी देता है और सत्तर हज़ार बुराईयों को दूर करता है।
ख़रबूज़ा बेहिश्ती फल है उसमें हज़ार बरकत, हज़ार रहमत और हर दर्द की शिफ़ा है।
ख़रबूज़ा मुबारक और पाकीज़ा फल है जो मुँह को पाक करता है क़ल्ब को नूरानी करता है, दाँतों को सफ़ेद और ख़ुदा को ख़ुश करता है। उसकी ख़ुशबू अम्बर, उसका पानी कौसर से, उसका गूदा फ़िरदौस से, उसकी लज़्ज़त बेहिश्ती और उसका खाना इबादत है।
ख़रबूज़ा का खाना मुबारक हो कि उसमें दस ख़ुसूसियात हैं। ग़िज़ा और पीने की चीज़ है, दाँतों को पाक करता है, मसाना (गुर्दों) को साफ करता है, शिकम को धोता है, चेहरे की ताज़गी को बढ़ाता है, जिन्सी क़ुव्वत में इज़ाफ़ा करता है और चेहरे की खाल को पाक और नर्म करता है।
अगर हामिला औरत ख़रबूज़ा और पनीर खाये तो बच्चे का अख़लाक़ नेक होगा।

अनारः


अनार को दाना-दाना खाओ कि इस तरह बेहतर है।
अनार खाओ कि क़ल्ब को रौशन करता है और इन्सान को चालीस दिन तक शैतान के वसवसों से दूर करता है।
जो एक पूरा अनार खाता है परवरदिगार चालीस दिन उसके क़ल्ब को नूरानी करता है।
तुमको अनार चाहिये कि वह भूखे को सेर करता है पेट भरे के लिये हाज़िम है।

कद्दूः


जो शख्स कद्दू मसूर की दाल के साथ खाये उसका दिल ज़िक्रे ख़ुदा के वक्त रक़ीक़ (नर्म) हो जायेगा।
कद्दू खाओ कि ख़ुदा ने उससे नर्म कोई दरख्त पैदा किया होता तो जनाबे यूनुस अ0 के लिये वही उगाता।
कद्दू खाओ कि दिमाग़ और अक्ल को ज़्यादा करता है और क़ल्बे ग़मगीन को ख़ुशहाल करता है।

किशमिश:

दो चीज़ों को दोस्त रखों और एहतेराम करोः किशमिश और खुरमा।
बेहतरीन चीज़ जिससे रोज़ादार अफ़तार कर सकता है किशमिश व ख़ुरमा या कोई मीठी चीज़ है।
जितना मुमकिन हो किशमिश इसतेमाल करो कि सफ़रा को निकालती है, बलग़म को ख़त्म करती है, आसाब को क़ुव्वत देती है, बदन की कमज़ोरी को दूर करती है और क़ल्ब को हयात बख़्शती है।
किशमिश से आसाब में मज़बूती और नफ़्स में पाकीज़गी पैदा होती है।
अंगूरः
अंगूर खाओ कि ग़म व अन्दोह को दूर करता है।
मेरी उम्मत की बहार अंगूर और ख़रबूज़ा है।

अंजीरः
अंजीर की मुँह की बदबू को दूर करती है, हड्डियों को मज़बूत करती है, दर्द में फाएदेमन्द है।
जो चाहता है कि दिल नर्म हो तो अंजीर बराबर खाये।

रौग़ने बनफ़शाः
रौग़ने बनफ़शा को दूसरे तेलों के मुक़ाबले में वैसी ही बरतरी हासिल है जैसे इस्लाम को दूसरे दीनों (मज़हबों) के मुक़ाबले में।

इतरे बनफ़शाः
अपने को इतरे बनफ़शा से मोअत्तर करो कि यह गर्मियों में खुनकी और सरदियों में गर्मी का सबब होता है।
हिना (मेंहदी) ः हिना इस्लाम का खि़ज़ाब है, मोमिन के अमल में इज़ाफ़ा करता है, सर दर्द दूर करता है, और आँखों की रौनक़ में इज़ाफ़ा करता है।
परवरदिगार ने कोई दरख्त नहीं पैदा किया जिसे हिना से ज़्यादा दोस्त रखता हो।

लहसुनः
लहसुन खाओ कि सत्तर दर्दों की दवा है।

प्याज़ः
जब तुम किसी शहर में पहुँचो तो सबसे पहले वहाँ की प्याज़ खा लिया करो ताकि उस शहर की बीमारियाँ तुमसे दूर रहेंे।

शहदः
जो शख्स महीने में कम से कम एक बार शरबते शहद पिये और ख़ुदा से उस शिफ़ा का सवाल करे जिसका ज़िक्र क़ुरआन में है तो (ख़ुदा) उसको सत्तर बीमारियों से शिफ़ा देगा।
अगर कोई तुम्हें शरबते शहद पेश करे तो इन्कार न करो।
अगर कोई शहद खाता है तो हज़ार दवायें उसके पेट में दाखि़ल होती हैं और हज़ार तकलीफ़ें दूर होती है।।
जो चाहता है कि याद्दाश्त ज़्यादा हो उसे शहद खाना चाहिये।
शहद बेहतरीन पीने की शय है कि क़ल्ब को हयात देता है और सीने की सर्दी को निकालता है।
पाँच चीज़ें निसयान (भूल) को दूर करती हैं, हाफ़िज़े को ज़्यादा और बलग़म को दफ़ा करती हैं, मिसवाक करना, रोज़ा रखना, क़ुरआन पढ़ना, शहद खाना और कुन्दुर खाना।
शहद खाओ कि पाकीज़गी और शादाबी का सबब है।
इमाम जाफ़रे सादिक़ अलैहिस्सलाम से मनक़ूल है कि किसी शख्स ने हज़रत रसूले ख़ुदा स0 से अज़ की कि मेरे भाई के पेट में दर्द है हुज़ूर ने फ़रमाया ‘‘थोड़ा शहद गरम पानी में मिला कर पिला दो’’।

रौग़ने ज़ैतून
रौग़ने ज़ैतून ग़ुस्से को कम करता है।
रौग़ने ज़ैतून चालीस दिन तक शैतान को क़रीब नहीं आने देता।
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